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भारत और चीन के बीच की ताकत का मुकाबला सिर्फ सीमाओं की जंग नहीं है, बल्कि यह इक्कीसवीं सदी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक बिसात है। अगर सीधे शब्दों में कहें, तो आर्थिक और सैन्य दोनों ही मोर्चों पर फिलहाल चीन का पलड़ा भारी दिखाई देता है, लेकिन युद्ध सिर्फ कागजी आंकड़ों से नहीं जीते जाते। हिमालय की दुर्गम ऊंचाइयों पर भारत की रणनीतिक स्थिति और उसकी युद्ध-प्रशिक्षित सेना बीजिंग के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह है, जिसे भेदना नामुमकिन है। दोनों परमाणु-सम्पन्न पड़ोसियों के बीच का यह शक्ति संतुलन केवल एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की व्यवस्था को तय कर रहा है।
आंकड़ों का मायाजाल: सैन्य और आर्थिक शक्ति का वास्तविक लेखा-जोखा
रक्षा बजट के मामले में चीन भारत से लगभग तीन गुना आगे खड़ा है। जहां चीन का आधिकारिक सैन्य बजट 230 अरब डॉलर से अधिक है, वहीं भारत लगभग 75 से 80 अरब डॉलर के बजट के साथ अपनी सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है। थल सेना की बात करें तो भारतीय सेना के पास दुनिया का सबसे बेहतरीन और अनुभवी माउंटेन वारफेयर (पर्वतीय युद्ध) दस्ता है। इसके विपरीत, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पास आधुनिक हथियारों और तकनीक की भरमार तो
एक कम-ज्ञात तथ्य जिसे अधिकांश लोग अनदेखा करते हैं
भारत और चीन की सैन्य और आर्थिक ताकत की तुलना में अक्सर एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू को छोड़ दिया जाता है: भू-राजनीतिक भूगोल (Geopolitical Geography) और युद्ध का अनुभव। चीन के पास भले ही रक्षा बजट और आधुनिक हथियारों की संख्या अधिक हो, लेकिन भारतीय सेना के पास दुनिया के सबसे ऊंचे और दुर्गम युद्धक्षेत्रों (जैसे सियाचिन) में लड़ने का वास्तविक और व्यावहारिक अनुभव है। चीनी सेना (PLA) ने दशकों से कोई बड़ा सक्रिय युद्ध नहीं लड़ा है, जबकि भारतीय सैनिक लगातार सीमा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा, तिब्बत के पठार की अत्यधिक ऊंचाई के कारण चीनी लड़ाकू विमानों की ईंधन और हथियार ले जाने की क्षमता काफी कम हो जाती है, जो भारत को एक प्राकृतिक रणनीतिक बढ़त देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत और चीन में से किसकी सेना अधिक शक्तिशाली है?
संख्या बल और बजट के मामले में चीन आगे है, लेकिन पहाड़ी युद्ध कौशल और वास्तविक युद्ध के अनुभव में भारतीय
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