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भारत में अमूमन लोग चिलचिलाती गर्मी से परेशान रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे ही देश में एक ऐसी जगह भी है जहाँ का तापमान शून्य से इतने डिग्री नीचे चला जाता है कि खून जम जाए? अगर आप सोच रहे हैं कि शिमला या मनाली इस सूची में सबसे ऊपर हैं, तो आप बिल्कुल गलत हैं। भारत का सबसे ठंडा बसा हुआ स्थान लद्दाख का द्रास (Dras) शहर है। कारगिल जिले में स्थित यह छोटा सा शहर न केवल भारत का, बल्कि साइबेरिया के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा रिहायशी इलाका माना जाता है। यहाँ की सर्दी किसी आम इंसान की कल्पना से परे है।
आंकड़ों की जुबानी: द्रास की हाड़ कंपाने वाली ठंड का कड़वा सच
द्रास की भौगोलिक स्थिति और इसके मौसम से जुड़े आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। यह समुद्र तल से लगभग 10,797 फीट (3,280 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ सर्दियों के महीनों में, विशेषकर जनवरी और फरवरी में, औसत तापमान -20 डिग्री सेल्सियस से -30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है। साल 1995 में यहाँ का न्यूनतम तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था, जो भारत के मौसम विज्ञान के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। यहाँ साल में करीब छह से सात महीने तक सूरज की किरणें बेअसर साबित होती हैं। सर्दियों में यहाँ की हवाएं इतनी बर्फीली होती हैं कि कुछ ही मिनटों में त्वचा को सुन्न कर देती हैं। इस दौरान पानी की पाइपलाइनें पूरी तरह से ठप हो जाती हैं, नदियाँ बर्फ की ठोस सड़क में तब्दील हो जाती हैं, और यहाँ तक कि रोजमर्रा की चीजें जैसे दूध और सब्जियां भी पत्थर की तरह सख्त हो जाती हैं।
शीत लहर के दावेदार: सियाचिन ग्लेशियर बनाम द्रास और लेह
जब हम भारत के सबसे ठंडे स्थानों की तुलना करते हैं, तो अक्सर लोगों के दिमाग में सियाचिन ग्लेशियर का नाम आता है। यह सच है कि सियाचिन में तापमान -50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, लेकिन वह एक सैन्य चौकी है, कोई सामान्य शहर या नागरिक आबादी वाला इलाका नहीं है। नागरिक बस्तियों की तुलना करें तो द्रास के बाद लेह और कारगिल मुख्य दावेदार बनते हैं। लेह में सर्दियों का तापमान -15 से -20 डिग्री सेल्सियस तक जाता है, जो द्रास की तुलना में थोड़ा कम जानलेवा है। हिमाचल प्रदेश का कीलांग और स्पीति घाटी का काजा भी इस दौड़ में शामिल हैं, जहाँ सर्दियों में तापमान -25 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। हालांकि, द्रास की घाटी की बनावट ऐसी है कि यहाँ ठंडी हवाएं कैद हो जाती हैं, जिससे यह इलाका बाकी सभी पर्वतीय शहरों की तुलना में कहीं अधिक क्रूर और जमा देने वाला बन जाता है।
अतिवादी मौसम की चेतावनी: जब प्रकृति सीमाएं लांघने लगती है
इतने कम तापमान वाले इलाके में घूमना या रहना कोई बचकाना खेल नहीं है; यहाँ जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। सबसे बड़ा खतरा 'हाई-एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा' (HAPE) और हाइपोथर्मिया का होता है, जहाँ शरीर का तापमान तेजी से गिरने लगता है और फेफड़ों में पानी भर सकता है। द्रास जैसे अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में 'फ्रॉस्टबाइट' का खतरा हर सेकंड मंडराता रहता है; अगर आपकी त्वचा सीधे तौर पर नंगी बर्फीली हवा के संपर्क में आती है, तो कुछ ही मिनटों में टिशूज मर सकते हैं, जिससे अंग काटने तक की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, सर्दियों में भारी हिमपात के कारण जोजिला दर्रा बंद हो जाता है, जिससे यह पूरा इलाका महीनों के लिए देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है। बिजली की भारी कटौती, मोबाइल नेटवर्क का गायब होना और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की अनुपलब्धता यहाँ के जीवन को बेहद अनिश्चित और खतरनाक बना देती है।
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