भोजपुरी सिनेमा के सबसे पहले और सबसे पुराने हीरो के रूप में नज़ीर हुसैन का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। सन 1963 में आई भोजपुरी की सबसे पहली फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' के मुख्य किरदारों में से एक नज़ीर हुसैन ही थे, जिन्होंने न सिर्फ इस फिल्म में अभिनय किया बल्कि इसकी कहानी लिखकर भोजपुरी फिल्म जगत की नींव रखी। हालांकि, अगर हम मुख्य अभिनेता या पारंपरिक लीड हीरो के तौर पर देखें, तो असीम कुमार और सुजीत कुमार को शुरुआती दौर का सबसे बड़ा सितारा माना जाता है। नज़ीर हुसैन ने इस क्षेत्रीय सिनेमा को अपनी पहचान देकर भोजपुरी को एक नया जीवन दिया था।

भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर के कुछ बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंकड़े

भोजपुरी सिनेमा का सफर करीब छह दशक से भी ज़्यादा पुराना है। सन 1963 में जब पहली फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' रिलीज हुई, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। महज कुछ लाख रुपये के मामूली बजट में बनी इस फिल्म ने उस दौर में करोड़ों का कारोबार कर दिखाया था। इसके बाद अगले दो दशकों में, यानी 1970 और 1980 के दशक के बीच, लगभग 50 से अधिक महत्वपूर्ण भोजपुरी फिल्मों का निर्माण हुआ। इन फिल्मों ने मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में अपनी धाक जमाई। शुरुआती दौर के हीरो सुजीत कुमार ने लगभग 15 से अधिक सुपरहिट भोजपुरी फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई, जिससे वे उस दौर के सबसे महंगे और चहेते अभिनेता बन गए। नज़ीर हुसैन ने अपने पूरे करियर में 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम करने के साथ-साथ भोजपुरी की शुरुआती 5 बड़ी फिल्मों को सीधे तौर पर प्रभावित और निर्देशित-लिखित किया। इन बुनियादी आंकड़ों से साफ पता चलता है कि भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत किसी शौकिया प्रयोग की तरह नहीं, बल्कि एक बेहद सफल व्यावसायिक क्रांति के रूप में हुई थी।

किरदारों और अभिनेताओं के बीच का द्वंद्व: कौन था असल में पहला महानायक?

भोजपुरी का सबसे पुराना हीरो कौन है, इस सवाल के जवाब में हमेशा दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं। पहले दृष्टिकोण के अनुसार, नज़ीर हुसैन ही भोजपुरी सिनेमा के भीष्म पितामह और पहले हीरो हैं। उन्होंने सिनेमाई स्क्रीन पर भोजपुरी भाषा की मिठास को उतारा और पारंपरिक रूप से गंभीर भूमिकाएं निभाईं। दूसरी तरफ, असीम कुमार और सुजीत कुमार का नाम आता है जिन्हें व्यावसायिक सिनेमा का असली चॉकलेट बॉय या एक्शन हीरो कहा गया। असीम कुमार ने पहली फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी, लेकिन सुजीत कुमार ने 'दंगल' (1977) जैसी फिल्मों के जरिए भोजपुरी सिनेमा को उसका पहला ब्लॉकबस्टर सुपरस्टार दिया। अगर हम सिर्फ ऐतिहासिक शुरुआत को देखें, तो नज़ीर हुसैन और असीम कुमार का पलड़ा भारी रहता है, क्योंकि उनके बिना इस भाषा में सिनेमा की कल्पना ही अधूरी थी। लेकिन अगर हम स्टारडम, लोकप्रियता और दर्शकों के बीच दीवानगी के पैमाने पर परखें, तो सुजीत कुमार को ही शुरुआती दौर का सबसे वास्तविक और ताकतवर हीरो माना जाता है। इन दोनों दृष्टिकोणों की अपनी-अपनी प्रासंगिकता है और यही वजह है कि भोजपुरी सिनेमा के इतिहास को खंगालते वक्त इन दिग्गजों के योगदान की तुलना बेहद पेचीदा हो जाती है।

इतिहास के पन्नों को खंगालते वक्त होने वाली कुछ बड़ी चूक और भ्रामक जानकारियां

अक्सर भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर बात करते समय लोग आधुनिक दौर के कलाकारों जैसे मनोज तिवारी, रवि किशन या दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को ही शुरुआती दौर का नायक समझ बैठते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। यह भ्रामक तथ्य इंटरनेट पर कई जगह फैला हुआ है और इससे हमारी नई पीढ़ी असली पुरोधाओं के नाम भूलती जा रही है। एक और बड़ी गड़बड़ी यह होती है कि कई लोग सन 1963 से पहले की कुछ मैथिली या मगही फिल्मों के किरदारों को भोजपुरी का पहला हीरो बता देते हैं। हमें यह स्पष्ट समझना होगा कि भाषाई सिनेमा का वर्गीकरण बेहद संवेदनशील होता है। बिना पुख्ता दस्तावेजों और ऐतिहासिक प्रमाणों के किसी भी अभिनेता को 'पहला हीरो' घोषित कर देना उस दौर के असली संघर्ष करने वाले कलाकारों के साथ सरासर नाइंसाफी है। इतिहास लेखन में जरा सी लापरवाही पुराने सिनेमा के पूरे ढांचे को विकृत कर सकती है, इसलिए ऐतिहासिक तथ्यों को हमेशा कसौटी पर परखना जरूरी है।

भोजपुरी सिनेमा का एक अनसुना सच

भोजपुरी सिनेमा के इतिहास को देखते समय अधिकांश लोग एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं। अमूमन लोग नज़ीर हुसैन या सुजीत कुमार को ही शुरुआती चेहरा मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजपुरी की पहली फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' (1963) की रूपरेखा तय करने में और इसे पर्दे पर उतारने में बिहारी लाल यादव जैसे पारंपरिक गायकों और कलाकारों का बहुत बड़ा योगदान था। इस फिल्म के मुख्य अभिनेता असीम कुमार थे, जिन्हें पहला आधिकारिक नायक माना जाता है। लेकिन पर्दे के पीछे की असली ताकत वे लोक कलाकार थे जिन्होंने सदियों पुरानी भोजपुरी संस्कृति को सिनेमाई रंग दिया। अधिकांश लोग इस ऐतिहासिक तथ्य को भूलकर केवल आधुनिक दौर के अभिनेताओं तक ही सीमित रह जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. भोजपुरी सिनेमा के सबसे पहले आधिकारिक हीरो कौन हैं?

भोजपुरी सिनेमा के सबसे पहले आधिकारिक हीरो असीम कुमार हैं, जिन्होंने 1963 में आई पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' में मुख्य भूमिका निभाई थी।

2. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का जनक किसे माना जाता है?

दिग्गज अभिनेता नज़ीर हुसैन को भोजपुरी सिनेमा का जनक माना जाता है। उन्होंने ही भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा से पहली भोजपुरी फिल्म बनाने की शुरुआत की थी।

3. सुजीत कुमार का भोजपुरी सिनेमा में क्या योगदान है?

सुजीत कुमार भोजपुरी सिनेमा के पहले सुपरस्टार माने जाते हैं। उन्होंने 1970 और 80 के दशक में 'दंगल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर इस इंडस्ट्री को व्यावसायिक सफलता दिलाई।

4. क्या मनोज तिवारी या रवि किशन सबसे पुराने हीरो हैं?

नहीं, मनोज तिवारी और रवि किशन भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक दौर (तीसरे दौर) के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं, जिन्होंने 2000 के दशक में इस इंडस्ट्री को पुनर्जीवित किया।

निष्कर्ष और आपकी राय

भोजपुरी सिनेमा के समृद्ध इतिहास को जानना हर सिनेमा प्रेमी के लिए जरूरी है। अगर हम इतिहास के सबसे पहले और सच्चे नायक की बात करें, तो हमें असीम कुमार और नज़ीर हुसैन के योगदान को सर्वोच्च स्थान देना होगा। आज का आधुनिक भोजपुरी सिनेमा जिस मुकाम पर है, उसकी नींव इन्हीं दिग्गजों ने रखी थी। आपको क्या लगता है कि किस अभिनेता ने भोजपुरी सिनेमा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें और इस ऐतिहासिक जानकारी को अन्य सिनेमा प्रेमियों के साथ शेयर करें।