विषय-सूची
- 1. ज़ार साम्राज्य से आधुनिक फेडरेशन तक: रूसी सैन्य तादाद का ऐतिहासिक सफर
- 2. रूसी सेना का ढांचा: भर्ती से लेकर तैनाती तक की जटिल प्रक्रिया
- 3. हालिया आंशिक लामबंदी: जब कागजी आंकड़े हकीकत में तब्दील हुए
- 4. विशेषज्ञों का इस पर क्या कहना है
- 5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- 6. क्या वैश्विक महाशक्तियों के बीच चल रही इस सैन्य होड़ में सैनिकों की यह विशाल संख्या भविष्य के युद्धों का रुख तय करेगी, या फिर आने वाले समय में केवल आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही सबसे बड़ा हथियार साबित होंगे?
शीत युद्ध की राख से उठकर 21वीं सदी के युद्धक्षेत्रों तक, क्रेमलिन की सैन्य शक्ति हमेशा से दुनिया के लिए एक पहेली और खौफ का सबब रही है। अगर आप आज के दौर में सीधे आंकड़े जानना चाहते हैं, तो रूस की सक्रिय सैन्य जनसंख्या लगभग 13 लाख से 15 लाख के बीच पहुंच चुकी है, जबकि उसके रिजर्व सैनिकों की संख्या इसे करीब 35 लाख के पार ले जाती है। यह महज एक संख्या नहीं है, बल्कि पश्चिमी देशों के सैन्य विश्लेषकों की रातों की नींद उड़ाने वाला एक भू-राजनीतिक सच है जिसने महाद्वीपों के समीकरण बदल दिए हैं।
ज़ार साम्राज्य से आधुनिक फेडरेशन तक: रूसी सैन्य तादाद का ऐतिहासिक सफर
रूस की विशाल जनसांख्यिकीय सैन्य क्षमता को समझने के लिए हमें इतिहास के उन पन्नों को पलटना होगा जहाँ लाल सेना (रेड आर्मी) ने द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी ताकतों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद, 1990 के दशक में रूस की आर्थिक कमर टूट चुकी थी, जिसके कारण उसकी सेना का आकार और बजट दोनों सिकुड़ गए। तत्कालीन सैन्य जनसांख्यिकी में भारी गिरावट आई और ऐसा लगने लगा कि रूसी भालू अब कभी दोबारा उस आक्रामक रूप में नहीं लौट पाएगा। हालांकि, व्लादिमीर पुतिन के सत्ता में आने के बाद परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। चेचन्या, जॉर्जिया और हालिया वर्षों में यूक्रेन संकट के बाद, रूस ने अपनी सैन्य नीति में आमूलचूल परिवर्तन किया। उसने भाड़े के सैनिकों (कॉन्ट्रैक्ट सोल्जर्स) और अनिवार्य सैन्य सेवा (कॉन्सक्रिप्शन) के एक हाइब्रिड मॉडल को अपनाया, जिसने उसकी सक्रिय वाहिनी को एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक फौजों की कतार में खड़ा कर दिया है।
रूसी सेना का ढांचा: भर्ती से लेकर तैनाती तक की जटिल प्रक्रिया
रूसी रक्षा मंत्रालय अपनी जनशक्ति को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित करता है, जो बेहद सुनियोजित तरीके से काम करती हैं। सबसे पहले आते हैं 'कोंट्राकनिकी' यानी पेशेवर अनुबंध सैनिक, जिन्हें मोटी तनख्वाह और भत्ते देकर स्वेच्छा से लंबी अवधि के लिए भर्ती किया जाता है; यही आधुनिक रूसी सेना की रीढ़ हैं। दूसरा स्तंभ है 'प्रिज़ीवनीकी', जिसके तहत 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए एक वर्ष की अनिवार्य सैन्य सेवा का कानून है, जिसे साल में दो बार—वसंत और शरद ऋतु में—लागू किया जाता है। जब कोई युवा इस अनिवार्य सेवा को पूरा कर लेता है, तो उसे सीधे 'सामरिक रिजर्व' (रिज़र्व फोर्स) में डाल दिया जाता है, जो इसका तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। हालिया सैन्य सुधारों के तहत, इन रिजर्व सैनिकों को नियमित अंतराल पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जाती है ताकि आपातकाल में इन्हें तुरंत मोर्चे पर भेजा जा सके। यह पूरी मशीनरी इतनी सुचारू रूप से चलती है कि रूस बिना किसी पूर्ण लामबंदी के भी लाखों सैनिकों को युद्ध के मैदान में झोंकने की क्षमता रखता है।
हालिया आंशिक लामबंदी: जब कागजी आंकड़े हकीकत में तब्दील हुए
इस पूरी व्यवस्था का सबसे ज्वलंत और व्यावहारिक उदाहरण सितंबर 2022 में देखने को मिला, जब यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार 'आंशिक लामबंदी' (पार्शियल मोबिलाइजेशन) की घोषणा की। इस कदम के तहत रक्षा मंत्रालय ने रातों-रात लगभग 3,00,000 रिजर्व सैनिकों को सक्रिय ड्यूटी पर बुला लिया, जिससे पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। इस प्रक्रिया ने दिखाया कि कैसे रूस की विशाल आरक्षित जनसंख्या केवल कागजों पर दर्ज कोई बेजान आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक सक्रिय सैन्य संसाधन है जिसे कुछ ही हफ्तों के भीतर आधुनिक हथियारों से लैस करके मोर्चे पर तैनात किया जा सकता है। यद्यपि इस लामबंदी को लेकर आंतरिक स्तर पर कुछ विरोध और पलायन भी देखा गया, लेकिन अंततः इसने साबित कर दिया कि जरूरत पड़ने पर क्रेमलिन अपनी सैन्य जनशक्ति को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम है।
विशेषज्ञों का इस पर क्या कहना है
वैश्विक सैन्य विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में रूस द्वारा अपनी सेना के आकार में की गई भारी वृद्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक कदम है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा आधिकारिक पदों की संख्या को बढ़ाकर लगभग 23.9 लाख (जिसमें 15 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक शामिल हैं) करने का निर्णय नाटो (NATO) के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने और पश्चिमी सीमाओं को मजबूत करने की एक सोची-समझी योजना है। हालांकि, 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' (ISW) जैसे प्रमुख संस्थानों के विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह विशाल संख्या काफी हद तक एक दीर्घकालिक लक्ष्य की तरह है, जिसे जमीनी स्तर पर पूरी तरह हासिल करना और उनके लिए आधुनिक हथियारों व प्रशिक्षण की व्यवस्था करना रूसी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में रूस का मुख्य ध्यान यूक्रेन के मोर्चे पर सैनिकों की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने और अपनी पुरानी सैन्य संरचना में बड़े सुधार करने पर केंद्रित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या रूस की सेना में सक्रिय सैनिकों के अलावा रिजर्व सैनिक भी शामिल हैं और उनकी संख्या कितनी है?
उत्तर: हां, रूस की सैन्य शक्ति में केवल सक्रिय ड्यूटी पर तैनात सैनिक ही शामिल नहीं हैं, बल्कि उसके पास एक बहुत बड़ा रिजर्व फोर्स (आरक्षित बल) भी मौजूद है। आधिकारिक आंकड़ों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, रूस के पास लगभग 20 लाख (2 मिलियन) रिजर्व सैनिक हैं। ये वे नागरिक हैं जिन्होंने पहले सेना में अनिवार्य या स्वैच्छिक सेवा पूरी की है और आपातकालीन स्थिति या युद्ध के समय उन्हें दोबारा देश की रक्षा के लिए बुलाया जा सकता है। रूस की कुल सैन्य क्षमता को समझने के लिए सक्रिय सैनिकों और इस विशाल रिजर्व बल दोनों को एक साथ देखा जाता है।
प्रश्न 2: क्या हाल के वर्षों में रूसी सेना में महिलाओं की भागीदारी में कोई बदलाव आया है?
उत्तर: हां, हालिया सरकारी रिपोर्टों और सैन्य आंकड़ों से पता चलता है कि रूसी सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका और संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। वर्तमान में लगभग 37,000 महिलाएं रूसी सेना में सक्रिय सैन्य कर्मियों के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्रालय और सेना से जुड़े विभिन्न नागरिक विभागों (Civilian Employees) में लगभग 2,63,000 महिलाएं कार्यरत हैं। हालांकि अग्रिम मोर्चों और लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं की संख्या अब भी सीमित है, लेकिन चिकित्सा, संचार, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में उनकी भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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