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दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के पास असल में कितना पैसा है, यह सवाल सिर्फ अर्थशास्त्रियों का नहीं बल्कि हर आम इंसान का सिर घुमा देता है। अगर हम चीन के पास मौजूद कुल राष्ट्रीय संपत्ति यानी नेशनल वेल्थ का आंकड़ा देखें, तो यह लगभग 120 से 160 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास बैठता है। यह रकम इतनी विशाल है कि इसे गिनने में भी पीढ़ियां बीत जाएंगी। हालांकि, यह सिर्फ सरकारी खजाने में रखा हुआ नकद पैसा नहीं है, बल्कि इसमें पूरे देश की जमीन, गगनचुंबी इमारतें, विदेशी मुद्रा भंडार, विशाल कारखाने और नागरिकों की निजी संपत्तियां भी शामिल हैं।
बीजिंग के आर्थिक वर्चस्व का ऐतिहासिक सफरनामा
अस्सी के दशक से पहले की बात करें तो चीन एक बेहद गरीब और कृषि पर निर्भर देश हुआ करता था। 1978 में जब माओ त्से तुंग के बाद डेंग शियाओपिंग ने कमान संभाली, तब उन्होंने 'ओपन डोर पॉलिसी' यानी खुले बाजार की नीति की नींव रखी। इसके बाद चीनी अर्थव्यवस्था ने जो रफ्तार पकड़ी, उसे आज भी इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार माना जाता है।
चीन ने खुद को रातों-रात दुनिया की फैक्टरी में तब्दील कर दिया। दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सस्ता श्रम, जमीन और ढीले नियम-कानून देकर आकर्षित किया गया। भारत या पश्चिमी देश जब तक समझ पाते, तब तक इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कपड़ों तक, हर चीज पर 'मेड इन चाइना' का ठप्पा लग चुका था। 2001 में विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ में शामिल होते ही चीनी निर्यात की बाढ़ आ गई। दशकों तक लगातार दो अंकों में रही विकास दर ने चीन के छोटे से विदेशी मुद्रा भंडार को महासागर में बदल दिया और देखते ही देखते यह देश खजाने के पहाड़ पर जा बैठा।
पैसा जमा करने और संपत्तियों का ढांचा खड़ा करने का फॉर्मूला
चीन की अथाह संपत्ति के पीछे एक बेहद रणनीतिक और चरणबद्ध तंत्र काम करता है, जो पश्चिमी पूंजीवाद से बिल्कुल अलग है:
पहला चरण: भारी व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस)
चीन दुनिया को सामान बेचता ज्यादा है और उनसे खरीदता बहुत कम है। इस प्रक्रिया से हर साल देश में अरबों डॉलर आते हैं, जिससे उनका केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर इकट्ठा करता रहता है।
दूसरा चरण: विशाल बुनियादी ढांचा और रियल एस्टेट विकास
इकट्ठा किए गए पैसों को चीन ने अपनी सीमाओं के भीतर बुनियादी ढांचे में झोंक दिया। हजारों किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन लाइनें, नए शहर और बंदरगाह बनाए गए। आज चीन की कुल संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा उसकी जमीनों और इमारतों के रूप में है।
तीसरा चरण: विदेशी संपत्तियों का अधिग्रहण
चीन ने सिर्फ अपने देश में पैसा नहीं रखा। 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत उसने अफ्रीका, एशिया और यूरोप के दर्जनों देशों को कर्ज दिया और वहां के बंदरगाहों और खदानों को खरीद लिया या लीज पर ले लिया।
एक ठोस मिसाल: 3 ट्रिलियन डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार
चीन की संपत्ति का सबसे ठोस और पारदर्शी सबूत है उसका विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व), जो लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े पर खड़ा है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसकी ताकत को समझने के लिए 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट का उदाहरण लिया जा सकता है। जब अमेरिका और पूरा यूरोप ताश के पत्तों की तरह ढह रहा था, तब चीन ने अपने इसी विशाल खजाने के दम पर लगभग 586 अरब डॉलर का एक आर्थिक पैकेज घोषित किया था। इस एक कदम ने न केवल चीन को मंदी से बचाया, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को संभालने में मुख्य भूमिका निभाई। आज भी चीन का केंद्रीय बैंक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में अरबों डॉलर निवेश करके रखता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका भी चीनी पैसे के कर्ज पर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की कुल संपत्ति और उसका विशाल विदेशी मुद्रा भंडार उसकी सबसे बड़ी वित्तीय ढाल भी है और एक जटिल चुनौती भी। विश्लेषकों के अनुसार, चीन के पास मौजूद $3.4 ट्रिलियन से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और उसका विशाल विनिर्माण ढांचा उसे किसी भी वैश्विक आर्थिक मंदी या झटके से बचाने की क्षमता प्रदान करता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि इस संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बॉन्ड्स और डॉलर-नामित संपत्तियों में लगा हुआ है, जिसे अचानक निकालना चीन के लिए आसान नहीं है।
प्रमुख वित्तीय जानकारों का कहना है कि चीन का असली वित्तीय ढांचा केवल उसके विदेशी मुद्रा भंडार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सरकारी कंपनियों और बुनियादी ढांचे में निहित है। फिर भी, घरेलू रियल एस्टेट संकट, स्थानीय निकायों पर बढ़ता कर्ज और पश्चिमी देशों के साथ जारी व्यापारिक तनाव उसकी संपत्तियों के वास्तविक मूल्य पर दबाव बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब केवल डॉलर जमा करने के बजाय अपनी मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूती से स्थापित करने की रणनीति अपना रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या विदेशी मुद्रा भंडार ही चीन की कुल कुल संपत्ति (Total Wealth) है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। विदेशी मुद्रा भंडार केवल केंद्रीय बैंक के पास जमा विदेशी परिसंपत्तियां और सोना होता है। चीन की कुल राष्ट्रीय संपत्ति (Net Wealth) में उसके सभी सरकारी और निजी बैंक, रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण उद्योग और नागरिकों की व्यक्तिगत संपत्तियां शामिल हैं, जो कुल मिलाकर 120 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक आंकी जाती हैं।
प्रश्न 2: चीन अपने इस विशाल धन का उपयोग मुख्य रूप से कहां करता है?
उत्तर: चीन अपने धन का उपयोग वैश्विक स्तर पर बुनियादी ढांचा विकसित करने (जैसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव), उन्नत प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर अनुसंधान, विदेशी कंपनियों में निवेश तथा अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए करता है। इसके अलावा, इसका उपयोग अपनी मुद्रा के विनिमय मूल्य को नियंत्रित रखने के लिए भी किया जाता है।
भविष्य का सबसे बड़ा सवाल
क्या चीन का यह अभूतपूर्व वित्तीय साम्राज्य और विशाल विदेशी संपत्ति आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को खत्म करके युआन को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वैश्विक मुद्रा बना पाएगी?
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