विषय-सूची
- 1. भारत के भौगोलिक और जनसांख्यिकीय इतिहास की अनकही दास्तान
- 2. यह वैश्विक रैंकिंग तंत्र आखिर कैसे काम करता है और भारत इसमें कहाँ ठहरता है?
- 3. डिजिटल क्रांति और कृषि का संगम: एक जीवंत लघु अध्ययन
- 4. विशेषज्ञों की राय (What experts say about it)
- 5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
- 6. क्या आपको लगता है कि केवल आर्थिक आंकड़े ही किसी देश की वास्तविक सफलता और उसकी सही वैश्विक स्थिति को बयां करने के लिए काफी हैं?
क्या आप जानते हैं कि अंतरिक्ष से देखने पर चमकने वाले इस विशाल भू-भाग की असली ताकत क्या है? जब हम यह सवाल पूछते हैं कि भारत देश कौन से नंबर पर है, तो इसका जवाब किसी एक सूची में नहीं छिपा है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है, तो वहीं आबादी के मामले में अब यह शीर्ष पर पहुँच चुका है। आइए, इस लेख की गहराई में उतरकर उन तमाम पैमानों को टटोलते हैं जो भारत के वैश्विक स्थान को तय करते हैं।
भारत के भौगोलिक और जनसांख्यिकीय इतिहास की अनकही दास्तान
पृथ्वी के पटल पर भारत की यह स्थिति रातोंरात नहीं बनी। सदियों पहले सिंधु घाटी सभ्यता के इन उपजाऊ मैदानों ने इंसानी बस्तियों को पनपने का मौका दिया। हिमालय की प्रहरी जैसी दीवारें उत्तर में डटी रहीं और दक्षिण में तीन ओर से हिंद महासागर ने इसे एक अनूठा प्रायद्वीपीय स्वरूप दिया। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि प्राचीन काल से ही भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता रहा है। मौर्य साम्राज्य से लेकर गुप्त वंश और मुगल सल्तनत तक, इस भू-भाग ने दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार के केंद्र के रूप में अपनी धाक जमाई। औपनिवेशिक काल की बेड़ियों ने भले ही इसकी रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा किया, लेकिन स्वतंत्रता के बाद आधुनिक भारत ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने के लिए लंबी छलांग लगाई। भौगोलिक दृष्टि से ३२,८७,२६३ वर्ग किलोमीटर में फैला यह देश दुनिया के कुल भू-भाग का लगभग दो दशमलव चार प्रतिशत हिस्सा घेरता है, जो इसे क्षेत्रफल की दौड़ में सातवें पायदान पर खड़ा करता है। दूसरी ओर, निरंतर बढ़ती युवा आबादी ने इसे मानव संसाधन के मामले में दुनिया का सबसे अग्रणी राष्ट्र बना दिया है, जहाँ हर छठा व्यक्ति भारतीय है।
यह वैश्विक रैंकिंग तंत्र आखिर कैसे काम करता है और भारत इसमें कहाँ ठहरता है?
किसी भी देश की वैश्विक स्थिति को मापने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन और थिंक टैंक कुछ निश्चित मानकों का सहारा लेते हैं। इस प्रक्रिया को समझने के लिए हमें इसके बुनियादी चरणों पर गौर करना होगा। सबसे पहले, डेटा का संकलन किया जाता है जिसमें संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संस्थान विभिन्न देशों से आंकड़े जुटाते हैं। दूसरे चरण में, इन आंकड़ों का वर्गीकरण विभिन्न क्षेत्रों जैसे अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता, नवाचार और भौगोलिक आकार के आधार पर किया जाता है। तीसरे चरण में, क्रय शक्ति समता यानी पीपीपी और सकल घरेलू उत्पाद जैसे आर्थिक सूत्रों के जरिए देशों की तुलना की जाती है। चौथे चरण में, सॉफ्ट पावर, कूटनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक पहुंच जैसे अमूर्त पैमानों को परखा जाता है। इन सभी चरणों के परिणाम स्वरूप निकलने वाली सूचियों में भारत की स्थिति बेहद दिलचस्प हो जाती है। आर्थिक मोर्चे पर भारत वर्तमान में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जिस गति से यह आगे बढ़ रहा है, वह जल्द ही तीसरे स्थान को छूने की ओर अग्रसर है। सैन्य शक्ति के मामले में भी भारतीय सशस्त्र बल अपनी तकनीकी दक्षता और विशाल जनबल के दम पर दुनिया के शीर्ष तीन देशों में गिने जाते हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में इसरो की उपलब्धियों ने इस रैंकिंग को और अधिक मजबूत किया है, जहाँ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है।
डिजिटल क्रांति और कृषि का संगम: एक जीवंत लघु अध्ययन
सिद्धांतों से आगे बढ़कर जब हम जमीनी हकीकत पर नजर डालते हैं, तो उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का एक छोटा सा गांव इसका जीता-जागता उदाहरण पेश करता है। कुछ साल पहले तक यहाँ के किसान पारंपरिक खेती और सीमित संसाधनों के कारण कर्ज के जाल में फंसे रहते थे। फिर डिजिटल इंडिया पहल के तहत शुरू किए गए ई-नाम पोर्टल और आधुनिक फिनटेक सेवाओं ने यहाँ के परिदृश्य को बदलकर रख दिया। किसानों ने अपने मोबाइल फोन के जरिए सीधे मंडियों के भाव देखने शुरू किए, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और उनकी आय में भारी उछाल आया। आज वही किसान ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके अपने खेतों में उर्वरक छिड़क रहे हैं। यह एक ऐसा सूक्ष्म उदाहरण है जो यह दर्शाता है कि कैसे भारत का तकनीकी बुनियादी ढांचा, जिसे 'इंडिया स्टैक' कहा जाता है, निचले स्तर के नागरिक को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक डेटाबेस आधार और यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली ने यह साबित कर दिया है कि पैमानों की सूची में भारत केवल संख्या बल के आधार पर नहीं, बल्कि डिजिटल नवाचार की गुणवत्ता के आधार पर भी शीर्ष पायदान की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों की राय (What experts say about it)
भारत देश की वैश्विक रैंकिंग और विभिन्न सूचकांकों में इसकी स्थिति पर देश-विदेश के अर्थशास्त्रियों, रणनीतिकारों और नीति निर्माताओं के बीच गहन चर्चा होती रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की वास्तविक ताकत इसकी विशाल युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल बुनियादी ढांचा और मजबूत घरेलू बाजार में निहित है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जब हम जीडीपी के आकार या क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर वैश्विक रैंकिंग देखते हैं, तो भारत दुनिया की शीर्ष महाशक्तियों में मजबूती से खड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं इस बात पर सहमति जताती हैं कि आने वाले दशकों में भारत वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बनेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि केवल कुल आंकड़ों या सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आकार को देखना ही पर्याप्त नहीं है। प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income), मानव विकास सूचकांक (HDI) और आय की असमानता जैसे संकेतकों पर अभी भी बहुत काम करने की आवश्यकता है। जानकारों का कहना है कि भारत की यह यात्रा कई चुनौतियों से भरी है, जिसमें रोजगार के नए अवसर पैदा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर को और ऊंचा उठाना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों की राय में, यदि भारत अपनी जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) का सही उपयोग कर पाता है, तो वह कई प्रमुख सूचकांकों में और अधिक ऊपर आ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
प्रश्न 1: क्या वैश्विक सूचकांकों में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है?
उत्तर: विभिन्न वैश्विक सूचकांकों में भारत की स्थिति मिली-जुली और क्षेत्र-विशेष पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, आर्थिक आकार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के मामले में भारत की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है और यह दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। हालांकि, कुछ सामाजिक और पर्यावरणीय संकेतकों जैसे कि मानव विकास सूचकांक या भुखमरी सूचकांक में सुधार की गति को लेकर विशेषज्ञों में अलग-अलग राय है। सरकार और नीति निर्माता इन क्षेत्रों में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
प्रश्न 2: भारत की रैंकिंग तय करने में किन प्रमुख मापदंडों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: भारत या किसी भी अन्य देश की रैंकिंग तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन विभिन्न मापदंडों का उपयोग करते हैं। इनमें कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP), प्रति व्यक्ति आय, आर्थिक विकास दर, व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business), नवाचार (Innovation Index), और मानव विकास सूचकांक (HDI) जैसे कारक शामिल होते हैं। प्रत्येक सूचकांक का अपना उद्देश्य और कार्यप्रणाली होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि वैश्विक मंच पर कौन सा देश किस स्थान पर है।
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