भारत के सबसे बड़े सूबे की धड़कनें सिर्फ इसकी आबादी से नहीं, बल्कि इसकी जटिल प्रशासनिक व्यवस्था से चलती हैं। क्षेत्रफल और जनसांख्यिकी के इस विशाल समंदर में कानून और व्यवस्था बनाए रखना लोहे के चने चबाने जैसा है। सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहें, तो वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल 18 मंडल (Divisions) हैं, जो इस पूरे प्रशासनिक साम्राज्य को संभालते हैं।

उत्तर प्रदेश में मंडलों के गठन का इतिहास और पृष्ठभूमि

यह प्रशासनिक ढांचा रातों-रात तैयार नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे दशकों का इतिहास छिपा है। ब्रिटिश काल से ही शासन को सुगम बनाने के लिए प्रांतों को कमिश्नरी या मंडलों में बांटने की परंपरा शुरू हुई थी। आज़ादी के बाद उत्तर प्रदेश जैसे वृहद राज्य में प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया। जैसे-जैसे जिलों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे कमिश्नर के अधीन आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन करना अनिवार्य हो गया। शुरुआत में मंडलों की संख्या कम थी, लेकिन समय की मांग के अनुसार नए मंडलों का सृजन किया गया। अलीगढ़, सहारनपुर और बस्ती जैसे नए मंडल इसी प्रशासनिक आवश्यकता का परिणाम हैं। हर मंडल के अंतर्गत कई जिले आते हैं, और मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) इस पूरी व्यवस्था का मुख्य स्तंभ होता है, जो ज़िला प्रशासन और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।

मंडल प्रणाली की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पदानुक्रम

यह समझना बेहद दिलचस्प है कि ज़मीनी स्तर पर यह व्यवस्था आखिर काम कैसे करती है। उत्तर प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा एक पिरामिड की तरह है, जिसके शीर्ष पर शासन और निचले स्तर पर ग्राम पंचायतें हैं। 18 मंडल इस पिरामिड का मध्य भाग हैं। प्रक्रिया की शुरुआत कमिश्नर कार्यालय से होती है। हर मंडल में एक मंडलायुक्त बैठता है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का वरिष्ठ अधिकारी होता है। उसके अधीन कई ज़िले आते हैं, जिनका नेतृत्व ज़िलाधिकारी (DM) करते हैं। मंडल स्तर पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा, विकास कार्यों की मॉनिटरिंग, और निचली अदालतों तथा राजस्व संबंधी अपीलों की सुनवाई होती है। जब कोई बड़ी नीति लागू करनी होती है, तो शासन सीधे मंडलायुक्त को निर्देश देता है, जो आगे चलकर अपने अधीन आने वाले सभी ज़िलों के डीएम को दिशा-निर्देश जारी करता है। इस तरह, निर्देशों का यह क्रमबद्ध प्रवाह पूरे राज्य में एकरूपता सुनिश्चित करता है.

एक व्यावहारिक उदाहरण: प्रशासनिक समन्वय और धरातलीय प्रभाव

इस पूरी व्यवस्था को एक वास्तविक परिदृश्य से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी बड़े मंडल, जैसे कि लखनऊ मंडल, के अंतर्गत आने वाले पांचों ज़िलों में सूखे या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की रणनीति बनानी है। ऐसे में लखनऊ के मंडलायुक्त एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाएंगे। वे रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे। कमिश्नर यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक ज़िले को राहत कोष समय पर मिले और राहत सामग्रियां गांव-गांव तक पहुंचे। यदि किसी एक ज़िले में प्रशासनिक सुस्ती दिखती है, तो मंडल स्तर से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। यह मिसाल साबित करती है कि कैसे 18 मंडलों का यह नेटवर्क मुख्यमंत्री और शासन की योजनाओं को सीधे आखिरी व्यक्ति तक बिना किसी अड़चन के पहुंचाने का काम करता है।

What experts say about it

प्रशासनिक मामलों और क्षेत्रीय विकास के जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में 18 मंडल प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य का दायरा और इसकी सघन जनसंख्या इतनी अधिक है कि केवल जिलों के भरोसे सीधे शासन चलाना असंभव सा हो जाता है। ऐसे में मंडलीय प्रणाली (Divisional System) शासन और आम जनता के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है। वरिष्ठ विश्लेषक यह भी रेखांकित करते हैं कि मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था की समीक्षा, विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग और स्थानीय शिकायतों का त्वरित निस्तारण निचले स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाता है। कई बार नीति निर्माता यह भी तर्क देते हैं कि प्रशासनिक कसावट को और अधिक मजबूत करने के लिए भविष्य में कुछ नए मंडलों का सृजन किया जा सकता है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन को पाटने में मदद मिले। बहरहाल, वर्तमान में कुल 18 मंडलों की यह संरचना राज्य के विकेंद्रीकरण का सबसे सफल उदाहरण मानी जाती है, जो शासन तंत्र को जनता के करीब लाने में लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Frequently Asked Questions

उत्तर प्रदेश में कुल कितने मंडल और जिले हैं?

उत्तर प्रदेश राज्य में प्रशासनिक सुविधा और सुचारू संचालन के लिए कुल 18 मंडल और 75 जिले बनाए गए हैं। प्रत्येक मंडल के अंतर्गत कई जिलों को शामिल किया जाता है, जिनकी देखरेख संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) द्वारा की जाती है।

उत्तर प्रदेश का सबसे नया मंडल कौन सा है?

उत्तर प्रदेश का 18वां और सबसे नया मंडल अलीगढ़ मंडल है, जिसे आधिकारिक तौर पर वर्ष 2008 में बनाया गया था। इसमें अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज जैसे चार प्रमुख जिलों को शामिल किया गया है।

क्या आपको लगता है कि उत्तर प्रदेश के विशाल भौगोलिक आकार और बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए 18 मंडलों की संख्या अब कम पड़ रही है और भविष्य में प्रशासनिक सुधार के लिए मंडलों का और अधिक विभाजन होना चाहिए?