अल्लाह ने दुनिया कितने दिन में बनाई? कुरान और इस्लामिक दृष्टिकोण से एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
इस्लाम धर्म और पवित्र कुरान के अनुसार, इस पूरी कायनात (ब्रह्मांड), आसमान, जमीन और उसमें मौजूद तमाम चीजों की रचना सर्वशक्तिमान अल्लाह ने छह दिनों में की है।
कुरान मजीद के स्पष्ट निर्देश
पवित्र कुरान में कई स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अल्लाह ने आसमान और जमीन को छह दिनों में पैदा किया।
"बेशक तुम्हारा रब अल्लाह ही है, जिसने आसमानों और जमीन को छह दिनों में पैदा किया, फिर वह अर्श पर मुस्तवी हुआ..."
इसके अलावा सूरह यूनुस, सूरह हुद, सूरह अल-फुरकान, सूरह अस्-सजदा, सूरह काफ और सूरह अल-हदीद में भी इसी बात को दोहराया गया है।
'दिन' (यौम) शब्द का वास्तविक अर्थ
यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि कुरान में जिस 'दिन' या 'यौम' का जिक्र किया गया है, वह हमारी दुनिया के सामान्य 24 घंटे वाले दिन नहीं हैं। कुरान की अन्य आयतों में इस बात का संकेत मिलता है कि अल्लाह के यहाँ का एक दिन इंसानी गणना के हिसाब से एक हजार साल या पचास हजार साल के बराबर हो सकता है।
काल-अवधि (Periods/Epochs): आधुनिक इस्लामी विद्वानों का मानना है कि यहाँ 'दिन' से तात्पर्य किसी निश्चित कालखंड, युग या चरणों (Stages) से है।
क्रमबद्ध प्रक्रिया: ब्रह्मांड का एक झटके में बन जाना मुमकिन था, क्योंकि अल्लाह की कुदरत के लिए 'कुन फयकून' (हो जा, और वह हो जाता है) काफी है, लेकिन छह दिनों में सृजन का यह क्रम इस बात का प्रतीक है कि हर कार्य एक बेहतरीन योजना और तरतीब (Systematic Order) के तहत किया गया।
सूरह फुस्सिलत का विवरण और तख्लीक के चरण
कुरान के सूरह फुस्सिलत (आयत 9 से 12) में इस छह दिवसीय प्रक्रिया का विवरण थोड़ा और विस्तार से मिलता है, जहाँ जमीन और आसमान के बनने के चरणों को अलग-अलग समय-सीमाओं में समझाया गया है:
जमीन की पैदाइश: पृथ्वी को दो दिनों में बनाया गया।
पहाड़ और बरकत: इसके बाद जमीन पर अटल पहाड़ रखे गए और उसमें भोजन व संसाधनों की व्यवस्था चार दिनों के भीतर पूरी की गई।
आसमानों की रचना: अंत में सात आसमानों को दो दिनों में मुकम्मल किया गया।
इस्लामी उलेमा के अनुसार, जमीन की पैदाइश के दो दिन और संसाधन तय करने के चार दिन मिलकर कुल चार दिन होते हैं।
क्या आप इस लेख के अगले भाग में यह जानना चाहते हैं कि इन छह दिनों के दौरान ब्रह्मांड के निर्माण का वैज्ञानिक दृष्टिकोण और इस्लामिक दर्शन आपस में कैसे मेल खाते हैं?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने पूरी कायनात को छह दिनों (अवधियों) में सृजित किया है।
छह दिनों (ऐ्याम) का वास्तविक अर्थ
कुरआन मजीद में अरबी शब्द 'यौम' (Yawm) का प्रयोग हुआ है, जिसका साधारण अर्थ 'दिन' होता है, परंतु अरबी भाषा में इसके मायने एक लंबे कालखंड या युग (Period/Stage) के भी होते हैं।
सृजन के विभिन्न चरण
सूरह फुस्सिलत में इस बात का विस्तार से वर्णन मिलता है कि इन छह अवधियों को किस प्रकार विभाजित किया गया था:
पृथ्वी का निर्माण: इस प्रक्रिया की शुरुआत में पृथ्वी और ब्रह्मांड के बुनियादी ढांचे को आकार देने में शुरुआती चरण बीते।
संतुलन और पोषण: इसके बाद के चरणों में पृथ्वी पर पहाड़ों को स्थापित किया गया, उसमें जीवन के लिए, वनस्पतियों और जीवों के लिए आवश्यक संसाधनों का सटीक संतुलन तय किया गया।
आकाश और व्यवस्था: अंत में, सातों आसमानों को व्यवस्थित किया गया और बाहरी ताकतों तथा ग्रहों की कक्षाओं को उनके निश्चित नियमों के अधीन किया गया।
संयम और हिकमत (Wisdom) का संदेश
अल्लाह तआला ने चाहा तो इस पूरी दुनिया को अपनी 'कुन' (यानी 'हो जा') के हुक्म से पल भर में भी बना सकता था, क्योंकि हर चीज़ पर उसकी कुदरत पूरी तरह हावी है।
क्या आप इस विषय से जुड़े किसी अन्य विशिष्ट पहलू या वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में जानना चाहते हैं?
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