नवजात शिशु को डकार कैसे दिलाए? (एक संपूर्ण मार्गदर्शिका) - भाग 1
नवजात शिशु की देखभाल करना दुनिया के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक है, लेकिन इसके साथ कई जिम्मेदारियां और बारकियां भी जुड़ी होती हैं।
नवजात शिशु को डकार दिलाना क्यों आवश्यक है?
शिशु जब दूध पीते समय हवा अंदर खींच लेते हैं, तो वह हवा उनके पेट में दबाव पैदा करती है।
गैस और पेट का दर्द: पेट में हवा फंसने से बच्चे को मरोड़ या पेट दर्द (कोलिक) की शिकायत हो सकती है।
दूध बाहर निकालना (उल्टी): कई बार बच्चे दूध पीने के तुरंत बाद दूध या दही जैसा गाढ़ा पदार्थ बाहर निकाल देते हैं, जिसे डकार दिलाकर काफी हद तक रोका जा सकता है।
अचानक बेचैनी और चिड़चिड़ापन: पेट में गैस होने के कारण बच्चा बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार रो सकता है और असहज महसूस कर सकता है।
बेहतर नींद: जब पेट हल्का और आरामदायक रहता है, तो बच्चा चैन की नींद सोता है।
डकार दिलाने के शुरुआती संकेत और सही समय
यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि बच्चे को डकार कब और कितनी बार दिलानी चाहिए।
यदि आपका शिशु दूध पीते समय अचानक छटपटाने लगे, स्तन या बोतल को मुंह से छोड़ दे, या अपने पैर पेट की तरफ मोड़ने लगे, तो समझ जाइए कि उसे हवा की वजह से असहजता हो रही है और उसे तुरंत डकार की आवश्यकता है।
क्या आप जानना चाहते हैं कि नवजात शिशु को डकार दिलाने के कौन-कौन से सबसे सुरक्षित और प्रभावी शारीरिक तरीके (मुद्राएं) होते हैं?
डकार दिलाते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी सावधानियां
नवजात शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है, इसलिए डकार दिलाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है:
हल्के हाथों का प्रयोग: शिशु की पीठ थपथपाते समय हमेशा अपने हाथों को हल्का रखें। कभी भी जोर से न थपथपाएं, क्योंकि इससे उसे चोट या असुविधा हो सकती है।
कपड़े का इस्तेमाल: दूध पिलाने के बाद डकार दिलाते समय शिशु थोड़ा दूध बाहर निकाल सकता है (जिसे स्पिट-अप कहते हैं)। यह पूरी तरह सामान्य है। इससे बचने के लिए अपने कंधे या गोद पर पहले से ही एक साफ मलमल का कपड़ा या टॉवल रख लें।
गर्दन को पूरा सपोर्ट दें: चूंकि नवजात शिशुओं की गर्दन की मांसपेशियां कमजोर होती हैं और वे अपना सिर खुद नहीं संभाल सकते, इसलिए डकार की किसी भी पोजीशन में उनके सिर और गर्दन को हमेशा अपने हाथों से सुरक्षित सहारा दें।
अगर बच्चा डकार न ले तो क्या करें?
कई बार काफी कोशिश करने के बाद भी बच्चा डकार नहीं लेता है।
समय सीमा: बच्चे को एक बार में 3 से 5 मिनट तक की ही डकार दिलाएं।
अगर वह इस दौरान डकार न ले, तो उसे जबरदस्ती परेशान न करें। वैकल्पिक तरीका: आप उसे थोड़ी देर के लिए पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों को साइकिल की तरह धीरे-धीरे घुमा सकती हैं। इससे पेट में फंसी गैस आसानी से पास हो जाती है।
सो जाने पर: यदि दूध पीते-पीते बच्चा गहरी नींद में सो गया है, तो उसे जबरदस्ती उठाकर डकार दिलाने की आवश्यकता नहीं है।
आप उसे सुरक्षित तरीके से सीधा लिटा सकती हैं।
सही तरीकों और थोड़े से अभ्यास से आप अपने शिशु के पाचन को दुरुस्त रख सकती हैं और उसे हर फीडिंग के बाद आरामदायक नींद दे सकती हैं।
क्या आप जानना चाहती हैं कि सोते समय नवजात शिशु के पेट में गैस बनने से कैसे रोकें?
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