महिलाओं में खतना क्या होता है? (Female Genital Mutilation - FGM)

महिला खतना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) या महिला जननांग कर्तन कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं या बच्चियों के बाहरी जननांगों को आंशिक या पूरी तरह से काट दिया जाता है। यह प्रथा मुख्य रूप से कुछ विशेष सांस्कृतिक, पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं के प्रभाव के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में निभाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस प्रक्रिया का कोई भी चिकित्सीय या स्वास्थ्य लाभ नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक और खतरनाक है।

महिला खतना के प्रमुख प्रकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महिला खतना को इसके प्रभाव और गंभीरता के आधार पर मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया है:

  • प्रकार 1 (क्लिटेरेक्टॉमी): इस प्रक्रिया में भगशेफ (Clitoris) के बाहरी हिस्से या उसकी त्वचा को आंशिक या पूरी तरह से काट कर हटा दिया जाता है।

  • प्रकार 2 (एक्सीजन): इसमें क्लिटोरिस और उसके आसपास के आंतरिक अंगों (लेबिया मिनोरा) को आंशिक या पूरा काट दिया जाता है।

  • प्रकार 3 (इन्फिब्यूलेशन): यह सबसे गंभीर और दर्दनाक प्रकार है। इसमें बाहरी जननांगों को काटकर एक सीवन जैसी संरचना बना दी जाती है ताकि योनि का मार्ग छोटा हो जाए। इसके खुलने के स्थान पर केवल मूत्र और मासिक धर्म के स्राव के लिए एक छोटा सा छिद्र छोड़ा जाता है।

  • प्रकार 4 (अन्य सभी हानिकारक तरीके): इसके अंतर्गत चिकित्सीय कारणों के बिना जननांगों को छेदना, खरोंच ना, काटना या जलाना जैसी अन्य प्रक्रियाएं आती हैं।

यह प्रथा क्यों और कहाँ की जाती है?

यह प्रथा मुख्य रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के कुछ देशों, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ चुनिंदा समुदायों में प्रचलित है। इसके पीछे मुख्य रूप से सामाजिक दबाव, पितृसत्तात्मक सोच और गलत मान्यताएं जुड़ी होती हैं:

  • कामकामता पर नियंत्रण: कुछ समाजों में यह गलत धारणा है कि ऐसा करने से महिलाओं की यौन इच्छा नियंत्रित रहती है और वे अपने परिवार तथा परंपराओं के प्रति वफादार बनी रहती हैं।

  • शुद्धता और स्वच्छता: कई संस्कृतियों में इसे पवित्रता, शालीनता और सामाजिक शिष्टाचार का हिस्सा मान लिया गया है।

  • विवाह की अनिवार्यता: कुछ समुदायों में इसे विवाह की पात्रता और सामाजिक स्वीकृति से जोड़कर देखा जाता है।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

यह प्रक्रिया आमतौर पर छोटी उम्र की बच्चियों (अक्सर 6 से 15 वर्ष की आयु के बीच) पर बिना किसी एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) के, अस्वच्छ उपकरणों और बिना चिकित्सकीय देखरेख के की जाती है। इसके कारण शरीर पर भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं:

  1. अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण: प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक खून बहने और गंदे उपकरणों के इस्तेमाल से खतरनाक इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

  2. तीव्र और असहनीय दर्द: बच्चियों को इस दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से भारी पीड़ा से गुजरना पड़ता है।

  3. मूत्र और प्रजनन संबंधी समस्याएं: भविष्य में पेशाब करने में कठिनाई, मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द, और प्रसव (डिलीवरी) के समय गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

  4. मानसिक आघात: इस प्रक्रिया के कारण महिलाओं को डिप्रेशन, एंग्जायटी, और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी मानसिक समस्याओं का जीवनभर सामना करना पड़ सकता है।

अंततः, महिला खतना एक मानवाधिकारों का हनन है जो महिलाओं की शारीरिक अखंडता और गरिमा को ठेस पहुंचाता है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कुप्रथा के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि आने वाली पीढ़ियों की बच्चियों को इस शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से बचाया जा सके।

महिलाओं के खतना के बारे में अधिक जानें

यह वीडियो महिलाओं के खतना की प्रक्रिया और उससे जुड़े सामाजिक तथा स्वास्थ्य पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

महिलाओं में खतना के प्रभाव और स्वास्थ्य पर दुष्परिणाम

महिला जननांग विकृति (FGM) या महिलाओं का खतना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से अत्यधिक हानिकारक प्रक्रिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रथा का कोई भी चिकित्सीय लाभ नहीं है, बल्कि इसके गंभीर व दीर्घकालिक दुष्प्रभाव होते हैं।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • तत्काल खतरे: यह प्रक्रिया अधिकांशतः बिना एनेस्थीसिया और अस्वच्छ उपकरणों से की जाती है, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज), तीव्र दर्द, और गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है।

  • दीर्घकालिक समस्याएं: इससे पीड़ित महिलाओं को जीवनभर मूत्रमार्ग में संक्रमण, असहनीय माहवारी, और स्कार टिशू (ऊतकों के निशान) बनने के कारण शारीरिक संबंध बनाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

  • प्रसव के दौरान जटिलताएं: प्रसव के समय यह प्रक्रिया माँ और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा जटिलताएं पैदा करती है, जिससे सिजेरियन डिलीवरी या अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम बढ़ जाता है।

  • मानसिक आघात: इस प्रकार का अनुभव लड़कियों और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। इसके कारण उन्हें पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), पुराना तनाव, चिंता और गंभीर डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र इसे महिलाओं और बालिकाओं के शारीरिक अधिकारों का हनन तथा लैंगिक हिंसा का रूप मानते हैं। दुनिया के कई देशों में इस पर सख्त कानूनी प्रतिबंध हैं। आधुनिक समय में इस कुप्रथा के खिलाफ सामाजिक जागरूकता तेजी से बढ़ रही है ताकि महिलाओं को इस शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाई जा सके।

FGM के स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जानें

यह वीडियो महिलाओं के खतना से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं और इसके प्रभावों को विस्तार से समझाता है।