भारतीय सेना का आर्मर्ड कॉर्प्स (Armoured Corps) दुनिया के सबसे शक्तिशाली और विशाल बख्तरबंद बलों में से एक माना जाता है। रेगिस्तान की तपती रेत हो, पंजाब के मैदानी इलाके हों या फिर लद्दाख और सिक्किम की बर्फीली और विषम ऊंचाइयां, भारतीय टैंक हर मोर्चे पर देश की सीमाओं की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं। अक्सर यह सवाल सैन्य विश्लेषकों और आम नागरिकों के मन में उठता है कि आखिर भारत के पास कुल कितने मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tanks - MBTs) हैं और दुनिया में भारतीय सेना की सैन्य शक्ति का क्या स्थान है।

इस विस्तृत लेख के पहले भाग में हम भारत के टैंक बेड़े की कुल संख्या, वैश्विक रैंकिंग और इसके मुख्य घटक—'टी-90 भीष्म' तथा 'टी-72 अजेय'—का गहन विश्लेषण करेंगे।

1. भारत के पास कुल कितने युद्ध टैंक हैं? (वैश्विक संदर्भ)

अंतर्राष्ट्रीय सैन्य विश्लेषण संस्थानों (जैसे Global Firepower और विभिन्न वैश्विक सैन्य समीक्षा रिपोर्ट्स) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सेना के पास वर्तमान में लगभग 3,800 से 4,200 मुख्य युद्धक टैंक (MBTs) सक्रिय सेवा में मौजूद हैं।

मापदंडआंकड़ा / स्थिति
कुल सक्रिय टैंक (Active MBTs)~3,854 से 4,201
ग्लोबल रैंक (टैंक संख्या के आधार पर)विश्व में चौथा या पांचवां स्थान
मुख्य प्रकारT-90S भीष्म, T-72M1 अजेय, अर्जुन (Mk-1/1A)
निर्माणाधीन/ऑर्डर परT-90 भीष्म, अर्जुन Mk-1A, जोरावर लाइट टैंक

वैश्विक स्तर पर टैंकों की कुल संख्या के मामले में भारत केवल रूस, चीन, अमेरिका और उत्तर कोरिया जैसे देशों की श्रेणी में आता है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की यह बख्तरबंद ताकत रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2. भारतीय आर्मर्ड कॉर्प्स की रीढ़: मुख्य टैंकों का वर्गीकरण

भारतीय सेना का टैंक बेड़ा मुख्य रूप से रूसी मूल के उन्नत टैंकों और स्वदेशी रूप से विकसित टैंकों का एक संतुलित मिश्रण है।

A. T-90S 'भीष्म' (T-90S Bhishma)

T-90 भीष्म भारतीय सेना का सबसे आधुनिक और मुख्य स्ट्राइक टैंक है। रूसी T-90 प्लेटफॉर्म पर आधारित इस टैंक को भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार कस्टमाइज किया गया है।

  • संख्या: वर्तमान में भारतीय सेना के पास लगभग 1,300+ T-90S और T-90M भीष्म टैंक सक्रिय सेवा में हैं।

  • मुख्य विशेषताएं:

    • 125mm स्मूथबोर गन: यह न केवल पारंपरिक गोले दाग सकती है बल्कि एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) दागने में भी सक्षम है।

    • कंचन/एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA): दुश्मन के मिसाइल और राकेट हमलों से टैंक की सुरक्षा करता है।

    • नाइट-विज़न और थर्मल इमेजिंग: रात के अंधेरे में भी कई किलोमीटर दूर दुश्मन को निशाना बनाने की क्षमता।

B. T-72M1 'अजेय' (T-72M1 Ajeya)

T-72 अजेय दशकों से भारतीय सेना का भरोसेमंद कार्यबल (Workhorse) रहा है। यद्यपि यह मूल रूप से 1970 और 80 के दशक की तकनीक है, लेकिन भारत ने अपने आधुनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रमों (Upgradation Programs) के तहत इन्हें पूरी तरह से री-इंजीनियर किया है।

  • संख्या: भारतीय सेना के पास लगभग 2,400+ T-72 अजेय टैंक हैं।

  • आधुनिकीकरण (Combat Improved Ajeya):

    • नए और अधिक शक्तिशाली इंजन (1000 HP)।

    • आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम (FCS) और ERA प्रोटेक्शन पैड।

    • नए नेविगेशन और नाइट-विजन उपकरण।

3. स्वदेशी गौरव: अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक (Arjun MBT)

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा निर्मित 'अर्जुन' भारत का पहला स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक है।

  • अर्जुन Mk-1: भारतीय सेना में लगभग 124 अर्जुन Mk-1 टैंक शामिल हैं, जो मुख्य रूप से राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में तैनात हैं।

  • अर्जुन Mk-1A: यह अर्जुन का अत्यधिक उन्नत संस्करण है, जिसमें 70 से अधिक नए सुधार किए गए हैं (जैसे स्वचालित लक्ष्य ट्रैकिंग, उन्नत ERA, और बेहतर मोबिलिटी)। रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 118 अर्जुन Mk-1A टैंकों का ऑर्डर दिया है।

(यह इस विषय पर विशेषज्ञ लेख का भाग - 1 है। भाग - 2 में हम लद्दाख सीमा पर तैनात 'जोरावर' लाइट टैंक, चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारत की स्थिति तथा भविष्य के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का विश्लेषण करेंगे।)

भारतीय बख्तरबंद ताकत का भविष्य और निष्कर्ष

भारतीय सेना (Indian Army) के बेड़े में युद्ध टैंकों की कुल संख्या लगभग 4,000 से 4,500 के बीच है, जो देश की थल सेना को सामरिक रूप से बेहद मजबूत बनाती है। इस टैंक बेड़े में रूस से आयातित और स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है।

प्रमुख टैंक और उनकी भूमिका

  • टी-90 भीष्म (T-90 Bhishma): रूसी मूल का यह टैंक भारतीय बेड़े की रीढ़ है, जिसकी संख्या 1,200 से अधिक है। यह अपनी मारक क्षमता और आधुनिक नाइट-विज़न उपकरणों के लिए जाना जाता है।

  • टी-72 अजय (T-72 Ajeya): यह संख्या बल के हिसाब से सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसके 2,400 से अधिक यूनिट्स विभिन्न सीमाओं पर तैनात हैं। समय-समय पर इनमें आधुनिक अपग्रेड किए गए हैं।

  • अर्जुन एमबीटी (Arjun MBT): डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित यह स्वदेशी टैंक अपनी 'कंचन armour' और सटीक निशाना लगाने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इसके उन्नत संस्करण (Mk-1A) को भी शामिल किया जा रहा है।

भविष्य की रणनीतिक तैयारियां

पर्वतीय क्षेत्रों और लद्दाख जैसे ऊंचे इलाकों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, भारत अब हल्के टैंकों (Light Tanks) जैसे 'जोरावर' (Zorawar) के विकास पर भी तेजी से काम कर रहा है। यह पहल भारतीय सेना को किसी भी दुर्गम इलाके में दुश्मन को मात देने के लिए और अधिक सक्षम बनाएगी।

संक्षेप में कहें तो, आधुनिक तकनीक, स्वदेशी अनुसंधान और विशाल टैंक बेड़े का यह संयोजन भारतीय रक्षा को अजय और सुरक्षित बनाता है।

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