फुटबॉल के जादूगर कौन हैं? खेल के मैदान पर कला और जादू की दास्तान
फुटबॉल केवल ग्यारह खिलाड़ियों के बीच मैदान पर दौड़ने और गोल करने का खेल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी अद्भुत कला है जो दुनिया भर के करोड़ों लोगों के दिलों में धड़कती है। इस खूबसूरत खेल के इतिहास में जब भी कला, फुर्ती, और असंभव को संभव कर दिखाने वाले जादू की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले और सबसे मजबूती से उभरकर सामने आता है—पेले (Pele)। एडसन अरांतेस डो नासिमेंटो (Edson Arantes do Nascimento), जिन्हें पूरी दुनिया प्यार से 'पेले' के नाम से जानती है, को सही मायनों में फुटबॉल का असली जादूगर माना जाता है।
पेले: वह नाम जिसने खेल की परिभाषा बदल दी
ब्राजील के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले पेले ने जब फुटबॉल के मैदान पर कदम रखा, तो उन्होंने इस खेल को एक नए ही आयाम पर पहुंचा दिया। उनके खेलने का अंदाज ऐसा था कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते थे। गेंद पर उनका नियंत्रण, हवा में छलांग लगाकर हेडर से गोल करना, और विरोधी डिफेंडरों को छकाते हुए निकल जाना किसी जादू से कम नहीं था।
जब उन्होंने मात्र 17 साल की उम्र में साल 1958 का अपना पहला विश्व कप खेला, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह युवा खिलाड़ी आगे चलकर इतिहास रच देगा।
तीन विश्व कप और अनगिनत रिकॉर्ड्स
पेले के फुटबॉल के जादूगर होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने अपने शानदार करियर में कुल तीन बार फीफा विश्व कप (1958, 1962 और 1970) का खिताब जीता। आज तक दुनिया का कोई भी अन्य खिलाड़ी अकेले अपने दम पर तीन विश्व कप ट्रॉफी नहीं जीत सका है। फीफा द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने अपने पूरे करियर में 784 गोल दागे, हालांकि उनके समर्थकों और जानकारों के अनुसार उनके कुल गोलों की संख्या 1200 से भी अधिक थी।
उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि 1960 के दशक में नाइजीरिया के गृहयुद्ध के दौरान, सिर्फ पेले का एक मैच देखने के लिए विरोधी गुटों के बीच 48 घंटे का युद्धविराम (Ceasefire) घोषित कर दिया गया था।
(यह इस विशेषज्ञ लेख का पहला भाग है। अगले भाग में हम जानेंगे कि आधुनिक युग में किन खिलाड़ियों को जादूगर की उपाधि दी गई है और खेल के बदलते स्वरूप में इस शब्द के क्या मायने हैं।)
पेले के बाद यदि फुटबॉल की दुनिया में किसी अन्य खिलाड़ी को 'जादूगर' की उपाधि दी गई, तो वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी डिएगो माराडोना और लियोनेल मेस्सी हैं। माराडोना का साल 1986 के विश्व कप में किया गया वह ऐतिहासिक 'हैंड ऑफ़ गॉड' गोल और अपनी जादुई ड्रिबलिंग से कई डिफेंडरों को छकाते हुए किया गया गोल आज भी प्रशंसकों के जेहन में जिंदा है। उन्होंने अकेले अपने दम पर अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया था। आधुनिक दौर में लियोनेल मेस्सी ने उस जादू को जिंदा रखा है, जिन्हें उनकी असाधारण पासिंग, विजन और फ्री-किक दक्षता के कारण फुटबॉल का नया जादूगर माना जाता है।
इन दिग्गजों के अलावा खेल प्रेमियों के दिलों में ब्राजील के रोनाल्डिन्हो का नाम भी खास तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने अपनी मुस्कुराती हुई शैली और मैदान पर असंभव लगने वाले चमत्कारी ट्रिक्स से पूरी दुनिया का मनोरंजन किया। रोनाल्डिन्हो के पास गेंद पर ऐसा नियंत्रण था कि दर्शक बस देखते रह जाते थे।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि "फुटबॉल के जादूगर" की कोई एक परिभाषा नहीं है, क्योंकि हर दशक ने एक ऐसा नगीना दिया है जिसने अपने खेल से इस खूबसूरत खेल को कला में बदल दिया। हालांकि, इतिहास के पन्नों में एडसन अरांतेस डो नासिमेंटो यानी पेले का नाम इस उपाधि के सबसे बड़े हकदार के रूप में हमेशा अमर रहेगा, जिन्होंने फुटबॉल को वैश्विक पहचान दिलाई।
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