<h1>आईपीएल नीलामी का सबसे बड़ा सौदा: जानिए लखनऊ की टीम कितने करोड़ में बिकी थी</h1> <p>आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे और चौंकाने वाले सौदे के तहत लखनऊ की फ्रेंचाइजी को आरपीएसजी ग्रुप ने रिकॉर्ड 7,090 करोड़ रुपये में खरीदा था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा आयोजित इस मेगा बिडिंग प्रक्रिया में इस भारी-भरकम आंकड़े ने वित्तीय विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया था, क्योंकि यह बोली शुरुआती अनुमानों से कई गुना अधिक थी और इसने उत्तर प्रदेश के इस नए क्रिकेट क्लब को वैश्विक खेल जगत के पटल पर रातों-रात सबसे अमीर franchises की कतार में ला खड़ा किया.</p> <h2>दो नई टीमों का रोमांचक आगमन और कॉर्पोरेट दिग्गजों की महा-लड़ाई</h2> <p>साल 2022 के आईपीएल सत्र से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने लीग के दायरे को विस्तृत करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया था, जिसके तहत टूर्नामेंट में दो बिल्कुल नई टीमों को शामिल किया जाना था। इस महत्वाकांक्षी विस्तार के लिए दुबई के एक शानदार होटल में खुली बोली यानी ओपन बिडिंग का आयोजन हुआ, जहां देश और दुनिया के नामी-गिरामी कॉर्पोरेट घराने अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे। बीसीसीआई ने इन नई फ्रेंचाइजी के लिए दो हजार करोड़ रुपये का न्यूनतम आधार मूल्य तय किया था, लेकिन कोई भी यह अनुमान नहीं लगा पा रहा था कि यह सौदा महज़ एक सामान्य व्यावसायिक लेन-देन से कहीं आगे निकल जाएगा।</p> <p>मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों से लेकर कॉरपोरेट बोर्डरूम तक, हर कोई इस बात को लेकर उत्सुक था कि आखिर किस औद्योगिक घराने के हाथ में देश के दो बड़े राज्यों के प्रतिनिधित्व की कमान आएगी। अडानी समूह, टोरेंट फार्मा, मैनचेस्टर यूनाइटेड के मालिक ग्लैज़र परिवार और कोटक जैसे दिग्गजों ने इस प्रक्रिया में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई। माहौल में एक अजीब सा तनाव और गजब का रोमांच था, क्योंकि हर एक बोली के साथ खेल अर्थशास्त्र के पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त होते जा रहे थे। इस तीखी और अनप्रिडिक्टेबल कॉर्पोरेट जंग में आखिरकार संजीव गोयनका के नेतृत्व वाले आरपीएसजी समूह ने मैदान मार लिया और उत्तर प्रदेश के इस सबसे बड़े शहर के नाम पर मुहर लगा दी।</p> <h2>असाधारण आंकड़े और लखनऊ सुपरजायंट्स के जन्म की अंदरूनी कहानी</h2> <p>जब संजीव गोयनका के स्वामित्व वाले आरपीएसजी ग्रुप ने लखनऊ फ्रेंचाइजी के लिए 7,090 करोड़ रुपये (लगभग 94 करोड़ अमेरिकी डॉलर) की भारी-भरकम राशि का ऐलान किया, तो वहां मौजूद हर शख्स अवाक रह गया। इस बेमिसाल आंकड़े ने न सिर्फ दूसरी बोली लगाने वाली सीवीसी कैपिटल (जिन्होंने अहमदाबाद को 5,625 करोड़ रुपये में खरीदा था) को पीछे छोड़ा, बल्कि पुरानी और स्थापित टीमों की कुल ब्रांड वैल्यू को भी कड़ी टक्कर दी। इस अभूतपूर्व निवेश के पीछे उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी, क्रिकेट के प्रति वहां के जुनूनी युवाओं का अथाह प्रेम और एक नया कमर्शियल हब बनाने की दूरगामी सोच छिपी थी।</p> <p>इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद आरपीएसजी ग्रुप ने आधिकारिक तौर पर 'लखनऊ सुपरजायंट्स' की नींव रखी। यह सौदा महज़ एक क्रिकेट टीम खरीदने का सौदा नहीं था, बल्कि भारतीय खेल बाजार में एक नए युग का शंखनाद था, जिसने यह साबित कर दिया कि आईपीएल अब केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर व्यावसायिक साम्राज्यों में से एक बन चुका है। भारी-भरकम निवेश के साथ शुरू हुई इस यात्रा ने मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह अपनी अमिट छाप छोड़ी है, जो आज भी खेल अर्थशास्त्र के इतिहास में एक अनूठा मील का पत्थर मानी जाती है।</p>
संजीव गोयनका और आरपी-एसजी ग्रुप का बड़ा दांव
अक्टूबर 2021 में दुबई में हुए ऐतिहासिक ऑक्शन के दौरान उद्योगपति संजीव गोयनका के आरपी-एसजी ग्रुप (RPSG Group) ने सबसे ऊंची बोली लगाकर इस फ्रेंचाइजी को अपने नाम किया था। लखनऊ टीम की यह ऐतिहासिक खरीद भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े व्यावसायिक सौदों में गिनी जाती है।
मुख्य बिंदु:
खरीद मूल्य: आरपी-एसजी समूह ने लखनऊ फ्रेंचाइजी को 7,090 करोड़ रुपये (लगभग 940 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा था।
रिकॉर्ड:
इस भारी-भरकम बोली के साथ ही लखनऊ टीम उस समय आईपीएल इतिहास की सबसे महंगी फ्रेंचाइजी बन गई थी, जिसने खेल जगत में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। प्रतिद्वंदिता: इस बोली की रेस में अडानी ग्रुप और कई अन्य बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज भी शामिल थे, लेकिन गोयनका समूह ने सबसे बड़ी बोली लगाकर बाजी मारी।
निष्कर्ष
इतनी बड़ी रकम में बिकने के बाद इस टीम का नाम 'लखनऊ सुपरजायंट्स' (LSG) रखा गया।
क्या आप लखनऊ सुपरजायंट्स के अब तक के स्क्वाड या खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में भी जानना चाहते हैं?
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