भारत और रूस की सदाबहार दोस्ती: इतिहास के आईने में

1. संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के मुद्दे पर कूटनीतिक कवच

आजादी के तुरंत बाद से ही पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र के कई मंच कश्मीर के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। शीत युद्ध के शुरुआती दौर में जब पाकिस्तान समर्थित ताकतों और पश्चिमी देशों के दबाव में भारत को घेरने की साजिश रची जा रही थी, तब सोवियत संघ ने भारत के पक्ष में मजबूती से कदम रखा।

सोवियत संघ (USSR) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपने वीटो पावर (Veto Power) का खुलकर इस्तेमाल किया और कश्मीर तथा भारत की संप्रभुता से जुड़े कई प्रस्तावों को विफल कर दिया। रूस का यह साथ उस समय भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ जब नव-स्वतंत्र भारत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दांव-पेच सीख ही रहा था।

2. 1971 का ऐतिहासिक युद्ध: जब अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ दीवार बना रूस

भारत-रूस मित्रता के इतिहास का सबसे स्वर्णिम और निर्णायक अध्याय 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध है। बांग्लादेश की मुक्ति के लिए लड़े गए इस युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन ने पाकिस्तान के समर्थन में अपने खतरनाक नौसैनिक बेड़े (जिसमें यूएसएस एंटरप्राइज भी शामिल था) को बंगाल की खाड़ी की ओर रवाना कर दिया था।

  • सोवियत संघ की त्वरित प्रतिक्रिया: जैसे ही इस खतरे की भनक तत्कालीन सोवियत संघ को लगी, उसने तुरंत अपने परमाणु-सशस्त्र जहाजों और पनडुब्बियों के बेड़े को हिंद महासागर में तैनात कर दिया।

  • कूटनीतिक चेतावनी: रूस ने स्पष्ट शब्दों में पश्चिमी देशों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने भारत की ओर कदम बढ़ाया, तो सोवियत संघ चुप नहीं बैठेगा।

रूस के इस साहसिक कदम के कारण अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना को पीछे हटना पड़ा, और भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में निर्णायक विजय प्राप्त कर एक नए राष्ट्र 'बांग्लादेश' के सृजन को सुनिश्चित किया। इससे ठीक पहले, 9 अगस्त 1971 को दोनों देशों के बीच 'शांति, मित्रता और सहयोग की संधि' पर हस्ताक्षर हो चुके थे, जिसने इस रिश्ते को अटूट कानूनी व रणनीतिक आधार दिया।

3. रक्षा और सैन्य आत्मनिर्भरता में अमूल्य सहयोग

भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में रूस हमेशा से रीढ़ की हड्डी रहा है। आधुनिक भारतीय सशस्त्र बलों के पास मौजूद साजो-सामान का एक बहुत बड़ा हिस्सा रूसी तकनीक पर आधारित है।

  • चाहे वह 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारत को सैन्य साजो-सामान उपलब्ध कराना हो, या फिर सुखोई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और आधुनिक एस-400 (S-400) मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसी रक्षा प्रणालियां देना हो, रूस ने हमेशा भारत को उन्नत तकनीक हस्तांतरित करने में उदारता दिखाई है।

  • 'ब्रह्मोस' जैसी विश्वस्तरीय क्रूज़ मिसाइल का विकास भी भारत और रूस के इसी रक्षा सहयोग का एक जीवंत प्रतीक है।

70 Years of Strategic Partnership Explained

यह वीडियो भारत और रूस के बीच पिछले सात दशकों की रणनीतिक साझेदारी, शीत युद्ध के दौर और द्विपक्षीय संबंधों के उतार-चढ़ाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

India-Russia Relations Explained: 70 Years of Strategic Partnership | Full Analysis Vision IAS Hindi · 5.5K views

कारगिल युद्ध और आधुनिक कूटनीति में रूस की भूमिका

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान जब एक बार फिर भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता पड़ी, तब रूस ने खुले तौर पर भारत की संप्रभुता का समर्थन किया। पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ किए जाने के बाद पश्चिमी देशों के शुरुआती दबाव के बीच रूस ने भारत के रुख को सही ठहराया और सामरिक साजो-सामान की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी। इसके साथ ही, कूटनीतिक मंचों पर भारत विरोधी प्रस्तावों को रोकने में भी सोवियत संघ के उत्तराधिकारी के रूप में रूस ने हमेशा एक भरोसेमंद सहयोगी की भूमिका निभाई।

संयुक्त राष्ट्र और वीटो पावर का सुरक्षा कवच

वैश्विक मंचों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जब भी पश्चिमी देशों द्वारा भारत को घेरने के प्रयास किए गए, रूस (और पूर्ववर्ती सोवियत संघ) ने अपने वीटो पावर का उपयोग करके भारत के हितों की रक्षा की। इतिहास इस बात का गवाह है कि कठिन समय में रूस ने कूटनीतिक ढाल बनकर भारत को हर अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाया है।

रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में अटूट साझेदारी

आज के दौर में भी दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आधुनिक रक्षा उपकरणों, अंतरिक्ष अनुसंधान और ऊर्जा सुरक्षा तक विस्तृत हैं। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट्स इस बात के प्रमाण हैं कि समकालीन समय में भी रणनीतिक साझेदारी के मामले में भारत और रूस एक-दूसरे के पर्याय बने हुए हैं। निष्कर्षतः, भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच यह द्विपक्षीय रिश्ता समय की कसौटी पर हमेशा खरा उतरा है।

1971 में रूस ने भारत की मदद क्यों की?

यह वीडियो 1971 के युद्ध के दौरान रूस द्वारा भारत को दिए गए ऐतिहासिक सामरिक और नौसैनिक समर्थन के बारे में विस्तार से बताता है।

1971 में रूस ने भारत की मदद क्यों की? | India Russia Friendship | History Facts Desh ke sainik · 1.1K views