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स्थानीय राजस्व और ब्रांड वैल्यू: आईपीएल फ्रेंचाइजी की अतिरिक्त कमाई
प्रसारण अधिकारों और केंद्रीय प्रायोजन के अलावा, आईपीएल टीमों की कमाई के कई अन्य स्थानीय और आंतरिक स्रोत भी होते हैं, जो उनके बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाते हैं। आइए जानते हैं कि ये स्रोत किस प्रकार काम करते हैं:
टिकटों की बिक्री (Ticket Sales): घरेलू मैदान (Home Ground) पर होने वाले मैचों के दौरान स्टेडियम में बिकने वाले टिकटों से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सीधे संबंधित फ्रेंचाइजी के पास जाता है। इसके अलावा वीआईपी बॉक्सेस और कॉर्पोरेट हॉस्पिटैलिटी पैकेज से भी तगड़ा मुनाफा होता है।
मर्चेंडाइज और उत्पाद बिक्री (Merchandising): फैंस के बीच अपनी टीम के प्रति दीवानगी को भुनाने के लिए फ्रेंचाइजी अपनी आधिकारिक जर्सी, कैप, रिस्टबैंड, बैट और अन्य फैन गियर बेचती हैं। ऑनलाइन और स्टेडियम स्टोर्स पर इन सामानों की भारी मांग होती है।
फ्रेंचाइजी प्रायोजन (Local Sponsorships): सेंट्रल स्पॉन्सरशिप के अलावा हर टीम अपने स्तर पर कई ब्रांड्स के साथ करार करती है। खिलाड़ियों के हेलमेट, पैड और जर्सी पर अलग-अलग कंपनियों के छोटे-बड़े लोगो होते हैं, जिनके बदले ये कंपनियां करोड़ों रुपये चुकाती हैं।
ब्रांड वैल्यू और ग्लोबल एक्सपेंशन: आईपीएल की सफलता सिर्फ दो महीने के खेल तक सीमित नहीं है। आज कई फ्रेंचाइजी ग्लोबल स्तर पर टी20 लीग्स (जैसे CPL या ILT20) में अपनी बहन टीमें (Sister Teams) खरीद रही हैं। इससे सालभर उनकी ब्रांड वैल्यू बनी रहती है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए डिजिटल विज्ञापन से भी मोटी कमाई होती है।
संक्षेप में कहें तो, आईपीएल टीमें केवल क्रिकेट मैच नहीं खेलतीं, बल्कि एक ऐसा बहुआयामी कमर्शियल साम्राज्य चलाती हैं जहाँ खेल के साथ-साथ विज्ञापन, मनोरंजन और मर्चेंडाइजिंग का अनूठा संगम होता है।
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