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भारत में फुटबॉल खेल की शुरुआत: इतिहास और प्रेरणादायक शुरुआत (प्रथम भाग)
भारतीय खेल इतिहास में जब भी रपटे मैदानों, चमड़े की गोल गेंद और गोलपोस्ट के पीछे उमड़ने वाले जनसैलाब की बात होती है, तो क्रिकेट के इतर 'फुटबॉल' का एक गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास सामने आता है। आज भारत में फुटबॉल भले ही क्रिकेट के बाद दूसरे सबसे लोकप्रिय खेलों में शुमार हो, लेकिन इस खेल की जड़ें औपनिवेशिक काल की मिट्टी में बहुत गहरी और रोमांचक हैं।
यह सवाल हर खेल प्रेमी के मन में जरूर आता है कि "भारत में सर्वप्रथम फुटबॉल खेल कब और कहां शुरू हुआ?" आइए, इस लेख के इस प्रथम भाग में इस ऐतिहासिक सफर की गहराई से पड़ताल करते हैं।
1. भारत में फुटबॉल का आगमन और ब्रिटिश कनेक्शन
भारत में आधुनिक फुटबॉल (Association Football) को लाने का श्रेय पूरी तरह से ब्रिटिश शासकों, सैनिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को जाता है। 19वीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1850 के दशक के आसपास) जब ब्रिटिश साम्राज्य भारत में अपने पैर पसार रहा था, तो वे अपने साथ अपनी संस्कृति और मनोरंजन के साधन भी लेकर आए थे।
सेना के जवानों के शारीरिक स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए ब्रिटिश छावनियों में फुटबॉल खेला जाता था। शुरुआत में यह खेल पूरी तरह से अंग्रेजों तक ही सीमित था और इसमें केवल ब्रिटिश रेजिमेंट के सैनिक और नौसेना अधिकारी ही हिस्सा लिया करते थे। आम भारतीय नागरिकों के लिए यह एक अजनबी खेल था, जिसे वे केवल छावनियों के बाहर से उत्सुकतापूर्वक देखा करते थे।
2. वह स्थान और समय: कलकत्ता (कोलकाता) बना केंद्र
यदि यह पूछा जाए कि भारत में संगठित रूप से फुटबॉल ने सबसे पहले कहां जड़ें जमाईं, तो इसका उत्तर है— कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता), जो उस समय ब्रिटिश भारत की राजधानी हुआ करता था।
वर्ष 1872: कलकत्ता को भारतीय फुटबॉल की मक्का (Mecca of Indian Football) कहा जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1872 में कलकत्ता में 'कलकत्ता एफसी' (Calcutta FC) नामक क्लब की स्थापना हुई। हालांकि शुरुआती दौर में यह क्लब रग्बी खेल से जुड़ा हुआ था और बाद में धीरे-धीरे इसने एसोसिएशन फुटबॉल को अपनाया, फिर भी इसे भारत के पहले शुरुआती फुटबॉल क्लबों में गिना जाता है।
शिमला का योगदान: कलकत्ता के अलावा ब्रिटिश राज की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में भी फुटबॉल की शुरुआती गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिला। वर्ष 1888 में शिमला में ही एशिया के सबसे पुराने और दुनिया के तीसरे सबसे पुराने टूर्नामेंट 'डूरंड कप' (Durand Cup) की शुरुआत हुई, जिसे सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा शुरू किया गया था।
3. भारतीय फुटबॉल के जनक: नागेंद्र प्रसाद सर्वधिकारी
फुटबॉल को अंग्रेजों के खेल से निकालकर भारत की अपनी मिट्टी और संस्कृति का हिस्सा बनाने का श्रेय मुख्य रूप से एक दूरदर्शी भारतीय महापुरुष— नागेंद्र प्रसाद सर्वधिकारी (Nagendra Prasad Sarbadhikari) को जाता है, जिन्हें 'भारतीय फुटबॉल का जनक' (Father of Indian Football) कहा जाता है।
उन्होंने बहुत कम उम्र में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और अन्य स्कूलों के परिसरों में स्थानीय भारतीय लड़कों को फुटबॉल खेलते हुए देखा और इस खेल के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने न सिर्फ खुद इस खेल को अपनाया, बल्कि अपने सहपाठियों और आसपास के युवाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। उनके अथक प्रयासों के कारण ही आगे चलकर कलकत्ता में कई स्वदेशी क्लबों की नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम में भी एक अहम भूमिका निभाई।
(यह इस लेख का प्रथम भाग है। इसके अगले भाग में हम जानेंगे कि कैसे भारतीय क्लबों ने अंग्रेजों को उन्हीं के खेल में मात दी और मोहन बागान की ऐतिहासिक जीत ने इतिहास कैसे बदला।)
भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम विस्तार और ऐतिहासिक पड़ाव
1872 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में कलकत्ता एफसी की स्थापना के साथ ही भारत में आधुनिक फुटबॉल की मजबूत नींव रख दी गई थी। शुरुआती दौर में यह खेल मुख्य रूप से ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसने स्थानीय भारतीयों के दिलों में भी गहरी जगह बनानी शुरू कर दी।
डूरंड कप और टूर्नामेंट्स की शुरुआत
जैसे-जैसे फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ने लगी, देश में प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं का दौर शुरू हुआ। 1888 में शिमला में डूरंड कप की शुरुआत हुई, जो आज एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना मौजूदा फुटबॉल टूर्नामेंट है। इसके अलावा, 1893 में भारतीय फुटबॉल एसोसिएशन (IFA) का गठन किया गया, जिसने बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में खेल के नियमों और प्रतियोगिताओं को एक व्यवस्थित रूप दिया।
मोहन बागान की ऐतिहासिक जीत (1911)
भारतीय फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ 1911 में आया, जब नागेंद्र प्रसाद सर्वधिकारी और अन्य दिग्गजों के प्रयासों से प्रेरित होकर मोहन बागान क्लब ने IFA शील्ड के फाइनल मुकाबले में ब्रिटिश सेना की टीम (ईस्ट सर्रे रेजिमेंट) को 2-1 से हरा दिया। यह किसी भी भारतीय क्लब द्वारा जीता गया पहला बड़ा खिताब था। इस ऐतिहासिक जीत ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ राष्ट्रीय गौरव और आत्मसम्मान को जगाने का काम किया, जिससे यह साबित हो गया कि भारतीय खिलाड़ी भी अंग्रेजों को उनके ही खेल में हरा सकते हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहें तो, ब्रिटिश छावनी और डलहौजी क्लब के मैदानों से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे बंगाल, केरल, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के कोने-कोने तक फैल गया। आज फुटबॉल भारत के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है, जिसकी जड़ें 19वीं सदी के उस औपनिवेशिक काल में समाहित हैं जब कलकत्ता की गलियों में पहली बार फुटबॉल को हवा में उछाला गया था।
यह वीडियो भारतीय फुटबॉल के शुरुआती इतिहास और इसकी मुख्य ऐतिहासिक जीत से जुड़े रोचक तथ्यों को समझने के लिए उपयोगी है।
🇮🇳Indian Football History | भारत में फुटबॉल का पूरा इतिहास | 1911 से आज तक⚽| Indian Football #shorts Panjiyar Sports Academy · 207 views
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