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फुुटबॉल जगत के महानायक क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मैदान पर उनके रिकॉर्ड, उनकी गोल करने की क्षमता और उनकी फिटनेस दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। दुनिया उन्हें एक ऐसे विजेता के रूप में जानती है जिसके पास शोहरत, दौलत और अनगिनत ट्रॉफियां हैं। लेकिन इस चमक-धमक और सफलता के पीछे एक ऐसा पन्ना भी है जो अक्सर रोनाल्डो की आंखों में आंसू ले आता है—वह है उनके स्वर्गीय पिता जोस दिनिस अवेइरो (José Dinis Aveiro) की यादें। जब भी रोनाल्डो अपने पिता के बारे में बात करते हैं, तो दुनिया के इस सबसे सख्त और आत्मविश्वासी खिलाड़ी के भीतर का एक संवेदनशील बेटा बाहर आ जाता है।
संघर्षों से भरा दौर और पिता की भूमिका
क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बचपन पुर्तगाल के मदीरा द्वीप पर बेहद तंगी में बीता था। उनके पिता जोस दिनिस अवेइरो स्थानीय फुटबॉल क्लब 'अंडोरिन्हा' में किट मैन (Kit Man) के रूप में काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी की जा सके। रोनाल्डो अक्सर बताते हैं कि उनके घर में धन की हमेशा कमी रहती थी। ऐसे माहौल में उनके पिता पर पूरे परिवार का पेट पालने की भारी जिम्मेदारी थी।
रोनाल्डो ने कई बार यह स्वीकार किया है कि उनके पिता की जिंदगी आसान नहीं थी। जोस दिनिस अवेइरो ने पुर्तगाली सेना में भी सेवा दी थी और अफ्रीका (मोजाम्बिक और अंगोला) में युद्ध का सामना किया था। इस युद्ध और कठिन परिस्थितियों ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था, जिसके कारण वे बाद में अत्यधिक शराब के सेवन (अल्कोहलिज्म) की आदत का शिकार हो गए थे। रोनाल्डो ने दर्द भरे लहजे में कई बार कहा है कि उनके पिता उस तरह के इंसान नहीं थे जिनके साथ खुलकर बैठा जा सके या सामान्य बातचीत की जा सके, क्योंकि शराब की लत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था।
पीयर्स मोर्गन के इंटरव्यू में छलके आंसू
रोनाल्डो के जीवन का सबसे भावुक क्षण वह था जब वर्ष 2019 में ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मोर्गन (Piers Morgan) के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्हें उनके पिता का एक पुराना वीडियो दिखाया गया। उस वीडियो में जोस दिनिस अवेइरो साल 2004 के यूरो कप के दौरान अपने बेटे (रोनाल्डो) की सफलता पर गर्व महसूस करते हुए नजर आ रहे थे। वह वीडियो ऐसा था जिसे रोनाल्डो ने पहले कभी नहीं देखा था।
जैसे ही स्क्रीन पर उनके पिता आए, रोनाल्डो अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और फूट-फूट कर रोने लगे। उस इंटरव्यू में रोनाल्डो ने नम आंखों से कहा था, "मैंने वह वीडियो पहले कभी नहीं देखा था... यह increíble (अविश्वसनीय) है।" उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस बात का सबसे बड़ा दुख और अफसोस है कि उनके पिता उनकी सफलता को पूरी तरह देखने के लिए जीवित नहीं रहे। रोनाल्डो जब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने, जब उन्होंने बैलन डी'ओर (Ballon d'Or) जीते और रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी, तब उनके पिता इस दुनिया में नहीं थे। वर्ष 2005 में लिवर की समस्या के कारण जोस दिनिस अवेइरो का मात्र 52 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, उस समय रोनाल्डो की उम्र महज 20 वर्ष थी और उनका करियर अभी परवान चढ़ ही रहा था।
एक अधूरा सपना और बेटे का मलाल
रोनाल्डो ने उस इंटरव्यू में यह भी साझा किया था कि उनके पिता उनके द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को कभी नहीं देख पाए। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे परिवार ने देखा कि मैं कितना सफल हुआ—मेरी मां ने देखा, मेरे भाइयों ने देखा, मेरे बड़े बेटे ने देखा, लेकिन मेरे पिता ने कुछ नहीं देखा। वे बहुत जल्दी चले गए।" रोनाल्डो इस बात से हमेशा आहत रहते हैं कि उनके पिता यह देखने के लिए मौजूद नहीं थे कि उनका बेटा दुनिया का नंबर वन फुटबॉलर बन गया है और परिवार की किस्मत बदल चुकी है।
यही वजह है कि रोनाल्डो जब भी मैदान पर उतरते हैं या कोई बड़ा खिताब जीतते हैं, तो उनकी सफलता की खुशी में कहीं न कहीं उस पिता की याद का दर्द भी छिपा होता है जो उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने की नींव रख गए थे, भले ही प्रत्यक्ष रूप से वे साथ न रह पाए हों।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो और उनके पिता जोस डैनिस अवेइरो (José Dinis Aveiro) के रिश्ते के बारे में यह दूसरा और अंतिम हिस्सा है:
सफलता के शिखर पर पिता की कमी का अहसास
जब क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर का खिताब ‘बालोन डी'ओर’ (Ballon d'Or) जीतना शुरू किया और मैनचेस्टर यूनाइटेड से लेकर रियल मैड्रिड तक रिकॉर्ड तोड़े, तो उनकी हर बड़ी उपलब्धि के साथ उनके पिता की यादें जुड़ी रहीं। रोनाल्डो ने कई बार मीडिया इंटरव्यू में कहा है कि उनकी सबसे बड़ी टीस यही है कि उनके पिता आज उनकी इसार सफलता और उनके बच्चों (पोते-पोतियों) को देखने के लिए इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं।
पियर्स मॉर्गन के साथ एक प्रसिद्ध इंटरव्यू में, रोनाल्डो तब भावुक हो गए थे जब उन्हें अपने पिता का एक पुराना वीडियो दिखाया गया था। उस इंटरव्यू में रोनाल्डो ने नम आंखों से कहा था:
"मैंने कभी अपने पिता को पूरी तरह से उस रूप में नहीं जाना, वह अक्सर शराब के नशे में रहते थे। मैंने उनसे कभी खुलकर सामान्य बातचीत नहीं की। मेरे जीवन की यह सबसे बड़ी उदासी है कि वह मेरी सफलता देखने के लिए कभी जिंदा नहीं रहे।"
रोनाल्डो की नजरों में एक पिता की सीख
अपने पिता के संघर्षों और कमजोरियों को करीब से देखने के बाद, रोनाल्डो ने यह कसम खाई कि वह अपने बच्चों के लिए एक अलग और आदर्श पिता बनेंगे। आज रोनाल्डो खुद चार बच्चों के पिता हैं और वह उनके पालन-पोषण में बहुत सक्रिय रहते हैं। वह अक्सर कहते हैं कि उनके पिता की जिंदगी ने उन्हें सिखाया कि बच्चों को समय देना और उनका मार्गदर्शन करना कितना जरूरी है।
अपने पिता के निधन (2005) के बाद रोनाल्डो ने यह भी प्रण लिया कि वह कभी भी शराब या ऐसी किसी बुरी आदत के करीब नहीं जाएंगे, जिसने उनके पिता के स्वास्थ्य को तबाह कर दिया था। इस तरह, उन्होंने अपने पिता की कमियों से भी एक सकारात्मक सीख ली।
एक अधूरा सपना जो अमर हो गया
जोस डैनिस अवेइरो भले ही अपने बेटे को दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर पहुंचते हुए देखने के लिए जीवित नहीं रहे, लेकिन रोनाल्डो का हर गोल और हर ट्रॉफी उनके पिता को ही समर्पित होती है। रोनाल्डो का मानना है कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके पिता के शुरुआती संघर्ष और परोक्ष रूप से दी गई सीख का भी बड़ा हाथ है।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि पारिवारिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, एक बेटा अपने पिता के संघर्षों को कैसे अपनी प्रेरणा बना सकता है। रोनाल्डो के लिए उनके पिता का वह अधूरा सपना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया, जिसने एक साधारण लड़के को फुटबॉल के इतिहास का अमर लीजेंड बना दिया।
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