ऑटोमोबाइल की दुनिया में बुगाटी (Bugatti) का नाम सुनते ही एक ऐसी भव्य और अविश्वसनीय तस्वीर उभरती है, जिसमें बेजोड़ रफ़्तार, करोड़ों रुपये की कीमत और शाही विलासिता शामिल होती है। जब कोई ऑटोमोबाइल प्रेमी यह सवाल पूछता है कि "दुनिया का सबसे सस्ता बुगाटी कौन सा है?", तो यह सवाल अपने आप में एक विरोधाभास पैदा करता है, क्योंकि बुगाटी जैसी ब्रांड के लिए "सस्ता" शब्द का कोई पारंपरिक अर्थ नहीं होता है। आम जनता की भाषा में जिस कार की कीमत को हम अत्यधिक या आसमान छूती हुई मानेंगे, बुगाटी के पोर्टफोलियो में वही मॉडल उसका सबसे किफायती और शुरुआती बिंदु माना जाता है। मोटरिंग इतिहास और वर्तमान बाज़ार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बुगाटी वेरॉन (Bugatti Veyron) को आधुनिक युग की वह सबसे पहली और "सस्ती" सुपरकार माना जाता है, जो इस फ्रेंच लग्जरी ब्रांड की रेंज में प्रवेश द्वार का काम करती है।
जब वोक्सवैगन समूह (Volkswagen Group) के स्वामित्व के तहत बुगाटी ने दो दशक पहले इस ब्रांड को पुनर्जीवित किया था, तब उनका मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग के उन आयामों को छूना था जो कभी किसी ने नहीं सोचे थे। इस प्रक्रिया का परिणाम बुगाटी वेरॉन 16.4 के रूप में सामने आया। आज के समय में जब नई बुगाटी कारें जैसे कि टर्बियॉन्ग (Tourbillon) या मिस्ट्रल (Mistral) चार से पांच मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 35 से 45 करोड़ रुपये से अधिक की शुरुआती कीमत पर बिकती हैं, तब पुरानी या प्री-ओन्ड वेरॉन लगभग 1.5 से 1.9 मिलियन डॉलर (तकरीबन 12 से 16 करोड़ रुपये) की कीमत पर उपलब्ध होती है। यही वजह है कि कलेक्टर्स और शौकीन इस आइकॉनिक मॉडल को आधिकारिक तौर पर सबसे "कम कीमत" वाली बुगाटी के रूप में देखते हैं, जिसे कंपनी ने कभी सड़क पर उतारने के लिए बनाया था।
इस गाड़ी के दिल में यानी इसके इंजन बे में एक बेहद जटिल 8.0-लीटर क्वाड-टर्बोचार्ज्ड W16 इंजन धड़कता है, जिसने ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग की दुनिया में तहलका मचा दिया था। यह इंजन लगभग 1,001 हॉर्सपावर की बेजोड़ ताकत पैदा करने में सक्षम है, जो उस दौर के हिसाब से किसी भी सड़क पर चलने वाली कार के लिए कल्पना से परे था। इसकी टॉप स्पीड 400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक है, जिसके कारण इसे चलाने के लिए सामान्य सड़कों के साथ-साथ विशेष एयरक्राफ्ट रनवे जैसी जगहों की चर्चा मजाक में ही सही, लेकिन गंभीरता से की जाती थी। इस प्रकार की तकनीकी उत्कृष्टता और हस्तशिल्प का स्तर किसी सामान्य कारखाने में तैयार नहीं होता, बल्कि फ्रांस के मोल्शेम स्थित बुगाटी के विशेष एटेलियर में इसे हाथों से गढ़ा जाता है, जो इसकी भारी-भरकम लागत का सबसे बड़ा कारण बनता है।
बुगाटी वेरॉन के विकास में आने वाली लागत इतनी अधिक थी कि एक समय ऐसा भी आया था जब वोक्सवैगन को हर एक वेरॉन की बिक्री पर भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था, क्योंकि इसके रिसर्च, डवलपमेंट और एयर-रोड एयरोडायनामिक्स परीक्षणों में अरबों रुपये खर्च हो चुके थे। इसके बावजूद, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को केवल अपनी इंजीनियरिंगखत्ता और सुपरकार सेगमेंट में सर्वोच्च बादशाहत कायम रखने के लिए जारी रखा। इस गाड़ी का टायर सिस्टम, गियरबॉक्स और कूलिंग मैकेनिज्म इतना यूनीक है कि इसके रखरखाव और सर्विसिंग का खर्च ही एक सामान्य लग्जरी सेडान की कीमत के बराबर बैठता है। यही कारण है कि भले ही इसे कागजों पर या रीसेल मार्केट में सबसे सस्ती बुगाटी कहा जाए, लेकिन इसका स्वामित्व अपने साथ खर्चों का ऐसा पहाड़ लेकर आता है जिसे केवल दुनिया के चुनिंदा रईस ही उठा सकते हैं।
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