भारत में लग्जरी और सुपरकारों का बाजार तेजी से बदल रहा है, और इसमें इतालवी ऑटोमोबाइल निर्माता फेरारी (Ferrari) का नाम सबसे ऊपर आता है। जब किसी का ध्यान सड़कों पर दौड़ती हुई किसी लाल रंग की रफ़्तार पर जाता है, तो सबसे पहले जुबान पर फेरारी का ही नाम आता है। भारत में फेरारी कारों की कुल संख्या को लेकर कोई एक निश्चित आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जाता है, क्योंकि कंपनी व्यक्तिगत खरीदारों और उनकी गोपनीय का पूरा ध्यान रखती है। फिर भी, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के अनुमानों और आरटीओ (RTO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल फेरारी कारों की संख्या लगभग 400 से 500 के आसपास होने का अनुमान लगाया जाता है, जिसमें नई और पुरानी दोनों तरह की आयातित सुपरकारें शामिल हैं।
भारतीय सड़कों पर फेरारी की उपस्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। एक समय था जब भारत में फेरारी देखना किसी दुर्लभ सपने जैसा हुआ करता था, क्योंकि आयात शुल्क (import duties), भारी कर और देश की सड़कों की बनावट इसके अनुकूल नहीं थी। लेकिन देश में बढ़ते अरबपतियों, उद्योगपतियों, बॉलीवुड हस्तियों और स्टार्टअप फाउंडर्स के कारण सुपरकारों की मांग में भारी उछाल आया है। फेरारी ने आधिकारिक तौर पर मुंबई और नई दिल्ली जैसे प्रमुख महानगरों में अपने आधिकारिक डीलरशिप नेटवर्क के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे ग्राहकों के लिए इन इतालवी मशीनों को खरीदना और उनकी देखरेख करना आसान हो गया है।
देश में मौजूद फेरारी कारों की इस कुल संख्या में विभिन्न पीढ़ियों के मॉडल शामिल हैं। पुरानी क्लासिक फेरारी कारों से लेकर आधुनिक हाइब्रिड सुपरकारों तक, भारतीय गैराजों में कई अद्भुत नमूने देखने को मिलते हैं। फेरारी रोमा (Ferrari Roma), फेरारी पोर्टोफिनो (Ferrari Portofino), फेरारी 296 जीटीबी (Ferrari 296 GTB), और फेरारी एफ8 ट्रिब्यूटो जैसी गाड़ियां देश के रईसों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, फेरारी की पहली एसयूवी 'पुरोसांगू' (Purosangue SUV) और हाल ही में चर्चा में आई फेरारी 12सिलिंडरी (12Cilindri) जैसी प्रीमियम गाड़ियां भी भारतीय बाजार में अपनी जगह बना चुकी हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में है।
भारत के अल्ट्रा-रिच लोगों के लिए फेरारी केवल एक वाहन नहीं बल्कि उनके रुतबे और सफलता का प्रतीक है। गौतम सिंघानिया जैसे जाने-माने उद्योगपति, जिनके पास फेरारी कारों का एक बेहतरीन कलेक्शन है और जो मोटरस्पोर्ट्स से भी जुड़े हैं, उन्होंने देश में इस संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, कई जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता और बड़े बिजनेस टाइकून भी इन गाड़ियों के मालिक हैं। हालांकि भारत में ऊंचे टैक्स स्ट्रक्चर और आयात नियमों के कारण इन कारों की कीमत यूरोप या अमेरिका की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाती है, फिर भी स्पीड के शौकीन इन्हें खरीदने से पीछे नहीं हटते हैं। यही वजह है कि तमाम आर्थिक चुनौतियों और प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद भारत में फेरारी कारों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इनकी संख्या में और अधिक इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।
भारत में फेरारी जैसी लग्जरी और सुपरकारों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है, जो देश में अल्ट्रा-रिच (अति-धनी) वर्ग के विस्तार और ऑटोमोटिव संस्कृति के प्रति बढ़ते क्रेज को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में फेरारी की बिक्री में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है, विशेष तौर पर साल 2026 के शुरुआती महीनों में ही भारत के भीतर दर्जनों नई फेरारी कारों का पंजीकरण हुआ है, जो यह साबित करता है कि भारतीय बाजार इन इतालवी सुपरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। देश के प्रमुख महानगरों जैसे मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में फेरारी के दीवाने और खरीदार बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में फेरारी के चाहने वालों का एक अलग ही वर्ग है। इन शहरों में न केवल आधुनिक मॉडल जैसे फेरारी रोमा, 296 जीटीबी, एफ8 ट्रिब्यूटो और एसएफ90 स्ट्राडेल सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं, बल्कि कई दुर्लभ और ऐतिहासिक विंटेज मॉडल भी कलेक्टर्स के पास सुरक्षित हैं। देश के कई जाने-माने उद्योगपति, बड़े व्यवसायी, सेलिब्रिटी और क्रिकेट जगत के दिग्गज इन सुपरकारों के मालिक हैं, जो इस ब्रांड की शान को और बढ़ाते हैं।
भारत में फेरारी कारों की कुल संख्या का सटीक आंकड़ा हर समय बदलता रहता है क्योंकि लगातार नए आयात और पंजीकरण हो रहे हैं, लेकिन माना जाता है कि देश भर में सक्रिय फेरारी कारों की संख्या सैकड़ों में है। कंपनी की ओर से भारत में अपनी डीलरशिप और सर्विस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों से भी यह साफ होता है कि यहां इन कारों की मांग स्थिर रूप से बढ़ रही है। भारी आयात शुल्क और टैक्स के बावजूद, भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में फेरारी का जलवा बरकरार है और यह देश के उच्च वर्ग की शान का प्रतीक बनी हुई है।
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