यहूदी धर्म में खतने को 'ब्रित मिलह' कहा जाता है, जिसका सीधा और स्पष्ट अर्थ है 'वाचा का काटना'। यह केवल एक शारीरिक प्रक्रिया या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय नहीं है, बल्कि यह ईश्वर और यहूदी लोगों के बीच हुए उस प्राचीन समझौते का एक अमिट शारीरिक चिह्न है जो चार हजार साल पहले शुरू हुआ था। यहूदी मान्यताओं के अनुसार, यह संस्कार हर नवजात लड़के के जन्म के आठवें दिन किया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि वह बच्चा अब आधिकारिक रूप से इब्राहीम की विरासत और यहूदी समुदाय का अटूट हिस्सा बन चुका है।

परंपरा की जड़ें और इब्राहीम के साथ ईश्वरीय समझौता

इस प्रथा की नींव को समझने के लिए हमें टोराह के पन्नों को पलटना होगा, जहाँ 'अब्राहम' (इब्राहीम) को ईश्वर ने आदेश दिया था कि वे और उनके वंशज अपने शरीर पर इस वाचा को धारण करेंगे। यह कोई साधारण आदेश नहीं था; यह एक आध्यात्मिक मोहर थी। रेगिस्तान की तपती रेत के बीच जब इब्राहीम ने नब्बे वर्ष से अधिक की आयु में स्वयं का खतना किया, तो उन्होंने एक ऐसी परंपरा को जन्म दिया जिसने आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों के अस्तित्व को परिभाषित कर दिया। यहूदी धर्मशास्त्र में इसे 'ओत' यानी एक 'संकेत' माना गया है। यह संकेत दर्शाता है कि यहूदी व्यक्ति अपनी शारीरिक इच्छाओं पर नियंत्रण रखेगा और ईश्वर के प्रति समर्पित रहेगा।

दिलचस्प बात यह है कि यहूदी कानून यानी 'हलाखा' के तहत, खतना केवल एक रस्म नहीं बल्कि एक अनिवार्य कर्तव्य है। अगर किसी कारणवश पिता अपने पुत्र का खतना नहीं करवा पाता, तो यह जिम्मेदारी पूरे समुदाय या बाद में उस व्यक्ति की स्वयं की हो जाती है। यहूदी इतिहास के काले पन्नों को देखें तो यूनानी और रोमन साम्राज्य के दौरान इस प्रथा पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर कोशिशें की गईं। यहूदियों को प्रताड़ित किया गया, लेकिन उन्होंने अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी 'ब्रित मिलह' को जीवित रखा। यह हठ केवल एक रस्म के लिए नहीं था, बल्कि अपनी विशिष्ट पहचान और ईश्वरीय वादे को बचाए रखने का एक क्रांतिकारी संघर्ष था।

आध्यात्मिक विश्लेषण: मांस का कटना और आत्मा का जुड़ना

अक्सर लोग पूछते हैं कि ईश्वर ने शरीर को अधूरा क्यों बनाया जिसे पूरा करने के लिए काटने की आवश्यकता पड़े? यहूदी दार्शनिकों का तर्क बड़ा ही अद्भुत और पेचीदा है। वे कहते हैं कि खतना इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य को इस दुनिया में 'अपूर्ण' भेजा गया है ताकि वह ईश्वर के साथ मिलकर खुद को और इस दुनिया को पूर्ण (तिक्कुन ओलाम) बना सके। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि प्रकृति द्वारा दी गई प्रवृत्तियों को केवल स्वीकार करना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें संस्कारित और परिष्कृत करना आवश्यक है। यह आध्यात्मिक अनुशासन का पहला पाठ है जो एक शिशु के जीवन के आठवें दिन ही शुरू हो जाता है।

यहाँ 'आठवें दिन' का महत्व भी असाधारण है। यहूदी रहस्यवाद (कबालाह) में संख्या सात प्राकृतिक दुनिया और सृजन के चक्र का प्रतीक है। संख्या आठ उस सीमा को पार कर 'अलौकिक' या दिव्य जगत में प्रवेश का संकेत है। खतना आठवें दिन करके यहूदी समाज यह घोषणा करता है कि यह बच्चा केवल प्रकृति के नियमों से बंधा हुआ जीव नहीं है, बल्कि इसका संबंध उस अनंत शक्ति से है जो समय और प्रकृति से ऊपर है। यह केवल त्वचा के एक छोटे से हिस्से का त्याग नहीं है, बल्कि अहंकार के विसर्जन और पवित्रता के मार्ग पर पहला कदम है।

व्यावहारिक निहितार्थ और सामाजिक पहचान का ताना-बना

आज के आधुनिक युग में, जहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है, खतना की यह प्राचीन प्रथा यहूदी परिवारों को उनके अतीत से जोड़ती है। जब एक 'मोहेल' (विशेषज्ञ जो खतना करता है) मंत्रोच्चार के साथ इस कार्य को संपन्न करता है, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति उस निरंतरता का गवाह बनता है जो हजारों वर्षों से अटूट है। यह एक सामाजिक गोंद की तरह काम करता है जो दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले यहूदी को उसके पूर्वजों की स्मृतियों से जोड़ देता है। यह केवल एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि एक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले लेता है, जहाँ बच्चे का नामकरण भी इसी दौरान किया जाता है।

इसके साथ ही, यहूदी समाज में खतना एक नैतिक जिम्मेदारी का भी आह्वान है। यह याद दिलाता है कि शरीर केवल भोग-विलास का साधन नहीं है, बल्कि वह एक मंदिर है जिसे पवित्र रखना अनिवार्य है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसके स्वास्थ्य लाभों पर लंबी बहस करता है, लेकिन एक कट्टर यहूदी के लिए इसका महत्व विज्ञान से कहीं ऊपर है। उनके लिए यह पहचान का वह प्रमाण पत्र है जिसे दुनिया की कोई भी ताकत उनसे छीन नहीं सकती। यह एक ऐसी अमिट पहचान है जो जन्म के कुछ दिनों बाद ही उस बालक को एक महान सभ्यता का उत्तराधिकारी बना देती है।

सामान्य गलतियाँ और विशेषज्ञ सुझाव

यहूदी खतना या ब्रिट मिलह के संदर्भ में सबसे बड़ी गलती इसे केवल एक सामान्य सर्जिकल प्रक्रिया मानना है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता को केवल चिकित्सा पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इसके आध्यात्मिक महत्व को भी समझना चाहिए। एक सामान्य भूल 'मोहेल' (खतना करने वाला विशेषज्ञ) के चयन में सावधानी न बरतना है। हमेशा सुनिश्चित करें कि मोहेल न केवल धार्मिक रूप से प्रशिक्षित हो, बल्कि आधुनिक स्वच्छता मानकों और प्राथमिक चिकित्सा में भी कुशल हो।

एक और महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि प्रक्रिया के बाद शिशु की देखभाल के लिए पहले से तैयारी रखें। अक्सर लोग अनुष्ठान के उत्सव में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे खतना के बाद के संक्रमण के संकेतों या रिकवरी के समय पर ध्यान देना भूल जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खतना के दौरान परिवार की उपस्थिति और शांतिपूर्ण माहौल शिशु के लिए तनाव कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा, यदि शिशु का स्वास्थ्य ठीक न हो, तो यहूदी कानून के अनुसार खतना को टालना अनिवार्य है; इसे जबरदस्ती आठवें दिन ही करने की जिद करना एक बड़ी गलती हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या यहूदी खतना केवल आठवें दिन ही किया जाना चाहिए?

हाँ, यहूदी परंपरा के अनुसार, खतना जन्म के आठवें दिन किया जाता है। हालांकि, यदि बच्चा बीमार है या डॉक्टर/मोहेल को लगता है कि वह शारीरिक रूप से तैयार नहीं है, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए इसे स्थगित कर दिया जाता है। पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के बाद ही प्रक्रिया संपन्न की जाती है।

2. 'मोहेल' और एक सर्जन के बीच क्या अंतर है?

एक सर्जन केवल चिकित्सा दृष्टि से खतना करता है, जबकि एक मोहेल धार्मिक और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में प्रशिक्षित होता है। मोहेल इस प्रक्रिया को एक पवित्र अनुबंध (कोवेनेंट) के रूप में संपन्न करता है और इससे जुड़े पारंपरिक प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों का पालन करता है।

3. क्या वयस्क होने पर भी खतना किया जा सकता है?

यदि किसी पुरुष ने जन्म के समय खतना नहीं करवाया है और वह यहूदी धर्म अपनाना चाहता है या अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहता है, तो वयस्क होने पर भी खतना किया जा सकता है। वयस्कों के लिए यह प्रक्रिया आमतौर पर अस्पताल में एनेस्थीसिया के साथ की जाती है।

संपादकीय निर्णय (Editorial Verdict)

यहूदी खतना केवल त्वचा का एक छोटा सा हिस्सा हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पहचान, निरंतरता और ईश्वर के साथ अटूट संबंध का प्रतीक है। हजारों वर्षों से चली आ रही यह परंपरा दर्शाती है कि कैसे एक समुदाय अपनी मान्यताओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखता है। मेरी राय में, खतना का महत्व इसके धार्मिक अनुशासन और वैज्ञानिक स्वच्छता के अनूठे मेल में निहित है। यह न केवल एक व्यक्तिगत संस्कार है, बल्कि पूरे यहूदी समाज को एक साझा इतिहास के धागे में पिरोने का एक सशक्त माध्यम भी है।