लखनऊ के ऐतिहासिक चारबाग रेलवे स्टेशन का सफर

भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन अपना एक खास मुकाम रखता है। अपनी बेमिसाल वास्तुकला और शाही अंदाज के लिए मशहूर इस रेलवे स्टेशन की नींव साल 1914 में रखी गई थी। उस दौर में इस भव्य इमारत को तैयार करने में करीब 60 से 70 लाख रुपये की लागत आई थी, जो उस समय के लिहाज से एक बहुत बड़ी रकम थी।

चारबाग रेलवे स्टेशन सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की कुछ बेहद महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि इसी स्टेशन पर पहली बार देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मुलाकात हुई थी। इस ऐतिहासिक मिलन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी।

आज जब आप इस स्टेशन को ऊपर से देखते हैं, तो यह एक शतरंज की बिसात जैसा नजर आता है। इसके गुंबद और मीनारें अवधी और राजपूत शिल्पकला का एक बेहतरीन मिश्रण पेश करती हैं। नवाबों के शहर लखनऊ आने वाले हर मुसाफिर का स्वागत यह स्टेशन अपनी इसी ऐतिहासिक शान और संस्कृति के साथ करता है।

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