विवाह से पहले की रातों का जादू
शादी के चार-पांच दिन पहले से ही घर में एक अलग ही उमंग छा जाती है। खासकर औरतें – बहनें, मामियां, दाईं और पड़ोसिनें – रात भर जागकर तैयारियों में लग जाती हैं। कोई लहंगा सिल रही होती है, कोई मेहंदी का पेस्ट बना रही होती है, तो कोई पारंपरिक गानों पर नाचने की रिहर्सल कर रही होती है।
ये रातें सिर्फ काम करने के लिए नहीं, बल्कि मस्ती, बातें और यादें बनाने के लिए होती हैं। चाय के दौर चलते रहते हैं, कहानियां सुनाई जाती हैं, और कई बार दूल्हे या दुल्हन के बचपन के किस्से हंसी का पात्र बन जाते हैं। ये पल न सिर्फ तैयारी के होते हैं, बल्कि परंपरा और प्रेम को जोड़ने के भी।
कई बार तो मेहंदी लगाते-लगाते ये तय हो जाता है कि शादी में कौन किसके साथ बैठेगा या कौन कौन सा गाना गाया जाएगा। रात गहराने पर भी थकान नहीं, बस उत्साह देखा जा सकता है।
आजकल कई तैयारियां बाहर की मदद से होने लगी हैं, पर फिर भी घर में रात भर जागकर काम क
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