1 डिग्री अक्षांश का महत्व

1 डिग्री से आशय पृथ्वी के गोलाकार आकार पर लंबाई की एक इकाई से होता है। अगर पृथ्वी बिल्कुल गोल होती, तो प्रत्येक स्थान पर 1° अक्षांश की दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती। यह माप विषुवत वृत्त पर सभी देशांतर रेखाओं के बीच भी लगभग समान होता।

लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग है। पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है—यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है और विषुवत रेखा पर उभरी हुई है। इसलिए जैसे-जैसे हम विषुवत वृत्त से उत्तर या दक्षिण की ओर ध्रुवों की तरफ बढ़ते हैं, 1° अक्षांश की लंबाई में थोड़ा परिवर्तन आता है। यह अंतर छोटा तो है, लेकिन मानचित्र निर्माण और भूगोल के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए, विषुवत रेखा पर 1° लगभग 110.5 किमी होता है, जबकि ध्रुवों के पास यह 111.7 किमी तक पहुँच जाता है। यह थोड़ा अंतर भी बड़े पैमाने पर नौसंचालन, सर्वेक्षण और मौसम पूर्वानुमान के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

इस तरह,

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