आईपीसी धारा 100: निजी बचाव का अधिकार कब तक मान्य है?

कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जाती है जब किसी व्यक्ति पर इतना भयंकर हमला होता है कि वह अपनी जान बचाने के लिए कड़े कदम उठाने को मजबूर हो जाता है। ऐसे में भारतीय दंड संहिता की धारा 100 एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है। यह वह धारा है जो बताती है कि किस स्थिति में व्यक्ति को अपनी या दूसरे की जान बचाने के लिए हमलावर को मारने या उसकी मृत्यु का कारण बनने का अधिकार होता है।

यह अधिकार तब लागू होता है जब हमले से स्पष्ट हो कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति आप पर छुरा या हथियार से हमला करता है और आपको यथोचित आशंका हो कि आपकी जान खतरे में है, तो आपका स्वयं को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाना कानूनी रूप से मान्य है।

धारा 100 के तहत निजी प्रतिरक्षा का यह अधिकार केवल तभी वैध होता है जब खतरा वास्तविक और तत्काल हो। यह कोई आक्रामक कदम नहीं, बल्कि स्व

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