धारा 116 और एस्टोपेल क्या है?

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 116 ऐसे मामलों से संबंधित है जहां कोई किरायेदार या कब्जे में रहने वाला व्यक्ति (लाइसेंसधारी) अपने मकान मालिक या जमीन के मालिक के खिलाफ कुछ दावा करता है। यह धारा उन्हें ऐसा करने से रोकती है यदि वे पहले से ही मालिक के अधिकार को मान चुके हों।

इसी संदर्भ में 'एस्टोपेल' (Estoppel) की अवधारणा आती है। यह शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द 'एस्टौप' (Estoup) से लिया गया है, जिसका अर्थ है—"मुंह बंद करो"। यानी, अगर कोई व्यक्ति एक तथ्य को सच मानकर चलता है या मान लेता है, तो बाद में वह उसके खिलाफ बोल नहीं सकता।

धारा 116 के तहत, अगर कोई किरायेदार या लाइसेंसधारी मकान मालिक के कब्जे या अधिकार को मानते हुए उसके घर में रह रहा है, तो वह बाद में यह नहीं कह सकता कि मालिक का उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है। ऐसा करने से वह एस्टोपेल के सिद्धांत से बाधित होता है।

सरल शब्दों में, यह न्यायिक सिद्धांत

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