आईपीसी की धारा 117 कब लगती है?

कई बार एक अपराध के पीछे सीधे तौर पर कोई भी न शामिल हो, लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से उसकी प्रेरणा दे सकता है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 117 महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह वह धारा है जो उन लोगों के खिलाफ लागू होती है जो किसी अपराध को करने के लिए दस या उससे अधिक लोगों के समूह को भड़काते या प्रेरित करते हैं।

इस धारा के तहत, अगर कोई व्यक्ति जनता या किसी बड़े समूह को किसी गैर-कानूनी कार्य के लिए उकसाता है, तो वह खुद भी अपराध का दोषी माना जाता है। यह नहीं देखा जाता कि उस व्यक्ति ने खुद अपराध किया या नहीं, बल्कि यह देखा जाता है कि उसने क्या भड़काऊ या गलत तरीके से प्रेरणा दी।

उदाहरण के लिए, अगर कोई नेता या व्यक्ति भीड़ को हिंसा के लिए उकसाता है, और उसके बाद हिंसा होती है, तो उस पर धारा 117 के तहत कार्रवाई हो सकती है। यह धारा सामाजिक शांति बनाए रखने और जनता में अशांति फैलाने व

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय