भारतीय संगीत के 12 स्वर: सरगम की बुनियादी समझ
संगीत की दुनिया बहुत विशाल है, लेकिन इसका मुख्य आधार केवल 12 स्वर होते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत (गायन और वादन दोनों) में इन्हीं 12 स्वरों का उपयोग करके अनगिनत राग, धुनें और गीत रचे जाते हैं। यदि आप संगीत सीख रहे हैं, तो इन स्वरों की सही पहचान होना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है।
ये 12 स्वर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किए गए हैं:
1. शुद्ध स्वर (7): ये संगीत के मूल और प्राकृतिक स्वर हैं, जिन्हें हम 'सप्तक' या सरगम के रूप में गाते हैं। ये हैं— सा, रे, ग, म, प, ध, और नी।
2. कोमल स्वर (4): जब कोई स्वर अपनी मूल जगह से थोड़ा नीचे (उतरकर) गाया या बजाया जाता है, तो उसे 'कोमल स्वर' कहते हैं। ये स्वर थोड़ा भारी और धीमा प्रभाव छोड़ते हैं। 12 स्वरों में चार कोमल स्वर होते हैं— कोमल रे, कोमल ग, कोमल ध, और कोमल नी।
3. तीव्र स्वर (1): जब कोई स्वर अपनी सामान्य स्थिति से थोड़ा ऊपर (चढ़कर) बजाया जाता है, तो उसे 'तीव्र स्वर' कहते हैं। हमारे संगीत में केवल एक ही तीव्र स्वर होता है— तीव्र म।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि 'सा' और 'प' को अचल स्वर माना जाता है, क्योंकि ये अपनी जगह से कभी परिवर्तित नहीं होते। बाकी के 5 स्वर (रे, ग, म, ध, नी) बदलकर कोमल या तीव्र रूप लेते हैं। इन्हीं 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र स्वर के अद्भुत संयोजन से संगीत की सुंदर रचनाएं बनती हैं।
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