द्वादश आदित्य: हिंदू धर्म में सूर्य के 12 स्वरूप

हिंदू धर्म और पुराणों में आदित्य को सूर्य देव का ही रूप माना गया है। महर्षि कश्यप और माता अदिति के पुत्र होने के कारण इन्हें आदित्य कहा जाता है। सौरमंडल की ऊर्जा और सृष्टि के संचालन में इनका विशेष महत्व है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इन आदित्यों की कुल संख्या 12 है, जो वर्ष के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक महीने में सूर्य का एक विशिष्ट रूप ब्रह्मांड को संचालित करता है। सनातन परंपरा में इनके नामों की सूची इस प्रकार मिलती है: अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु

विभिन्न पुराणों में इन नामों में थोड़ा बहुत अंतर भी देखने को मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार इनके नाम धाता, मित्र, अर्यमा, शुक्र, वरुण, अंश, भग, विवस्वान, पूषा, सविता, त्वष्टा एवं विष्णु बताए गए हैं। नाम भले ही अलग हों, लेकिन ये सभी स्वरूप प्रकृति के चक्र, ऋतुओं के परिवर्तन और मानव जीवन को ऊर्जा प्रदान करने से जुड़े हैं।

उदाहरण के लिए, वरुण देव जल तत्व और सागर के नियमन से जुड़े हैं, तो विवस्वान प्रकाश का प्रतीक हैं। वहीं विष्णु रूप को संपूर्ण सृष्टि का पालनहार माना गया है। समय के चक्र यानी काल चक्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए इन 12 आदित्यों की आराधना वैदिक काल से ही अत्यंत फलदायी मानी गई है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय