1947 में भारत के राज्य: एक नए राष्ट्र की शुरुआत

1947 में भारत के स्वतंत्र होने के समय, देश एक जटिल राजनीतिक ढांचे में बंटा हुआ था। इस दौरान भारत में कोई 562 रियासतें (स्वशासी राज्य) थीं, जो ब्रिटिश शासन के अधीन थीं, लेकिन अपने शासकों के अधीन स्वायत्त रूप से चलती थीं। इनमें हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, मैसूर और बड़ौदा जैसी प्रमुख रियासतें शामिल थीं।

स्वतंत्रता के बाद, नए भारत के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती थी – इन रियासतों को एकजुट करना। सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन जैसे नेताओं के प्रयासों से अधिकांश रियासतों ने भारत में विलय का रास्ता चुना। इसके बाद एक सशक्त केंद्रीय व्यवस्था के तहत देश को संगठित करने का काम शुरू हुआ।

अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर राज्यों का पुनः गठन करना एक बड़ी जरूरत थी। इसी के परिणामस्वरूप, 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत नए राज्य बनाए गए। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश की स

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