1990 में कश्मीर में हुई हिंसा और उसके प्रभाव
1990 का साल कश्मीर के इतिहास में एक दर्दनाक अध्याय है। इस दौरान घाटी में बढ़ते आतंकवाद और सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने के कारण हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1990 में ही 44 हजार से अधिक परिवार अपने घरों से विस्थापित हुए और जम्मू समेत अन्य भागों में शरण लेने पर मजबूर हुए। कुल मिलाकर, 1 लाख 54 हजार 712 लोग पलायन कर गए। इनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित थे, जो सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से घाटी के मूल निवासी थे।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1989 के बाद शुरू हुई आतंकवादी गतिविधियों में कम से कम 219 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि लाखों लोगों के दर्द और टूटे सपनों की गवाही हैं।
इस दौर ने न सिर्फ मानवीय त्रासदी को जन्म दिया, बल्कि कश्मीर के सामाजिक ढांचे को गहरा झटका भी दिया। आज भी, कई परिवार उसी विस्थ
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