सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66A क्या थी?

धारा 66A सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का एक प्रावधान था, जिसने इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिए "आपत्तिजनक सूचना" भेजने पर सख्त पाबंदी लगाई थी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति, अगर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए ऐसी जानकारी भेजता पाया जाता था जिसे "अपमानजनक, नफरत भरा या झूठा" माना जाए, तो उस पर कार्रवाई हो सकती थी। इसके तहत जुर्माना और सात साल तक की सजा का प्रावधान था।

हालांकि, यह धारा काफी विवादों में रही। कई लोगों का मानना था कि इसका दुरुपयोग हो रहा है और इसके जरिए बेवजह लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है, खासकर सोशल मीडिया पर राय व्यक्त करने वालों को। सरकार के इरादे शायद साफ थे, लेकिन इसकी व्याख्या इतनी व्यापक थी कि छोटी-छोटी पोस्ट्स के लिए भी मुकदमे चलाए गए।

इन्हीं वजहों से सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च, 2015 को इस धारा को असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायालय ने

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