भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सफर
साल 2004 का समय भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मोड़ था, जब देश में कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी थी। उस दौर में ईंधन के दाम आज के मुकाबले बेहद कम हुआ करते थे। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2004 में देश में पेट्रोल की कीमत महज 36.81 रुपए प्रति लीटर थी, जबकि डीजल करीब 24.16 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिकता था। आम जनता के लिए वाहन चलाना और सफर करना आज के मुकाबले काफी आसान और सस्ता हुआ करता था।
समय के साथ देश की सियासत और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के बदलने के साथ ही ईंधन के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया। साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग (NDA) सरकार की सत्ता में वापसी हुई, तब तक पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग 71 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुकी थी। इसके बाद के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव और टैक्स में बढ़ोतरी के चलते कीमतों में लगातार इजाफा होता रहा।
हाल के वर्षों यानी 2021 तक आते-आते पेट्रोल के दाम बढ़कर 106 रुपए प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर गए। इसी अवधि के दौरान डीजल की कीमतों में भी भारी तेजी देखने को मिली, जो कभी 24 रुपए के आसपास था वह बढ़कर पहले 57 रुपए और फिर 100 रुपए प्रति लीटर तक जा पहुंचा। ईंधन के इन बढ़ते दामों ने देश में महंगाई और आम आदमी के बजट को हमेशा एक बड़ा मुद्दा बनाए रखा है।
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