2013 में भारत का बाह्य ऋण: एक विश्लेषण

वर्ष 2013 में भारत की आर्थिक स्थिति और विदेशी देनदारियों को समझने के लिए देश के बाह्य ऋण का विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण है। मार्च 2013 के अंत में भारत का सरकारी बाह्य ऋण लगभग 81.7 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जो घटकर जून 2013 के अंत में 78.4 बिलियन अमरीकी डॉलर पर आ गया। सरकारी स्तर पर इस कर्ज में आई कमी वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत थी।

भारत के कुल विदेशी कर्ज की संरचना पर नजर डालें तो इसमें सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र का अंतर काफी स्पष्ट दिखता है। जून 2013 के अंत तक देश के कुल बाह्य ऋण में सरकारी हिस्सेदारी केवल 20.2 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, गैर-सरकारी क्षेत्र का हिस्सा 79.8 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जो कुल कर्ज का सबसे बड़ा भाग था।

यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि उस समय भारत का अधिकांश विदेशी कर्ज निजी कंपनियों, व्यावसायिक उधारी और गैर-सरकारी वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। निजी क्षेत्र द्वारा वैश्विक बाजारों से अधिक पूंजी जुटाने के कारण विदेशी कर्ज में गैर-सरकारी हिस्सेदारी का दबदबा बना रहा। हालांकि इसने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को गति दी, लेकिन साथ ही वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव और विनिमय दर के जोखिमों को भी बढ़ा दिया था।

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