2014 से पहले भारत का कर्ज और आर्थिक स्थिति

किसी भी देश की आर्थिक स्थिति और उसकी प्रगति को समझने के लिए उस पर मौजूद कर्ज और आबादी का अनुपात देखना बेहद जरूरी होता है। वर्ष 2014 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में थी, इसे समझने के लिए उस समय के आंकड़े काफी अहम भूमिका निभाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2014 में भारत पर कुल विदेशी कर्ज लगभग 33.89 लाख करोड़ रुपये था।

उस समय देश की कुल जनसंख्या लगभग 129 करोड़ दर्ज की गई थी। इस लिहाज से देखा जाए तो देश का आर्थिक ढांचा बुनियादी सुविधाओं, विकास परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संतुलन को बनाए रखने के लिए इस कर्ज पर निर्भर था। सरकारों द्वारा देश में नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं को पूरा करने के लिए विदेशी व आंतरिक स्रोतों से कर्ज लिया जाता रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज की रकम के साथ-साथ यह देखना भी जरूरी होता है कि उसका इस्तेमाल देश की जीडीपी (GDP) और विकास दर को बढ़ाने में किस तरह किया गया। वर्ष 2014 के आंकड़े भारत के आर्थिक इतिहास और उसके बाद हुए बदलावों की तुलना करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

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