भारत का विदेशी कर्ज: एक नजर 2022 के आंकड़ों पर

दुनियाभर के देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कर्ज लेते हैं। वर्ष 2022 के आंकड़ों की बात करें, तो मार्च 2022 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज 620.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा इससे पिछले साल यानी 2021 की तुलना में लगभग 8.2 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इस कुल बाहरी कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर (53.2%) के रूप में मौजूद है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव देश के कर्ज भुगतान पर सीधा असर डालता है। वहीं, दूसरा बड़ा हिस्सा भारतीय रुपये (31.2%) के रूप में देय है। शेष कर्ज में जापानी येन, यूरो और अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल हैं।

किसी भी विकासशील देश के लिए विदेशी कर्ज एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है। जब कोई देश इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाता है, तो उसे अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होती है। यदि कर्ज का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक (long-term) हो और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) मौजूद हो, तो अर्थव्यवस्था पर इसका जोखिम काफी कम हो जाता है। 2022 के इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का वित्तीय ढांचा एक संतुलित स्थिति में बना हुआ था।

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