धारा 236: भारत में बैठकर विदेश में नकली सिक्के बनवाना भी अपराध

भारतीय दंड संहिता की धारा 236 एक ऐसे प्रावधान के बारे में बताती है, जो आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने में मदद करती है। इसके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति भारत में रहते हुए विदेश में सिक्कों के कूटकरण (यानी नकली सिक्के बनाने) को लेकर किसी को उकसाता या प्रेरित करता है, तो वह अपराधी माना जाएगा।

यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति भारत की सीमा के भीतर बैठकर बाहर के देश में किसी को नकली सिक्के बनाने के लिए प्रेरित करे। ऐसे मामले में, कानून इसे उसी तरह से दंडनीय मानता है मानो उस व्यक्ति ने खुद भारत में ही इस गतिविधि को अंजाम दिया हो।

इस धारा का उद्देश्य स्पष्ट है — ऐसे अपराधों से बचाव करना जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। नकली सिक्के बनाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह मुद्रा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी डगमगा देता है।

आज के समय में, जब अपराध अंतरराष्ट्रीय

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