असम का शौर्य: लचित दिवस और सरायघाट का ऐतिहासिक युद्ध
भारत के इतिहास में 24 नवंबर का दिन वीरता, राष्ट्रभक्ति और अदम्य साहस का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूरे असम में बेहद गर्व और उत्साह के साथ लचित दिवस (Lachit Divas) मनाया जाता है। यह खास दिन अहोम साम्राज्य के महान सेनापति लचित बोरफुकन की जयंती और उनकी ऐतिहासिक कूटनीतिक विजय की स्मृति में समर्पित है।
सन 1671 में गुवाहाटी के पास ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर प्रसिद्ध सरायघाट का युद्ध लड़ा गया था। एक तरफ मुगलों की विशाल और शक्तिशाली सेना थी, तो दूसरी तरफ अपने मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्पर अहोम सेना। लचित बोरफुकन ने अपनी कूटनीति, छापामार युद्ध रणनीति और जल सेना के बेहतरीन उपयोग से मुगल आक्रांताओं को बुरी तरह परास्त किया था। बेहद बीमार होने के बावजूद उन्होंने मैदान-ए-जंग में खुद कमान संभाली और अपनी सेना में नए प्राण फूंक दिए।
सरायघाट की यह विजय केवल एक सैन्य जीत नहीं थी, बल्कि इसने पूर्वोत्तर भारत में मुगलों के विस्तार पर पूर्ण विराम लगा दिया था। लचित बोरफुकन की इसी अदम्य वीरता, कड़ा अनुशासन और मातृभूमि के प्रति अतुलनीय समर्पण को नमन करने के लिए हर साल 24 नवंबर को लचित दिवस के रूप में याद किया जाता है।
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