24 घंटे के दिन की शुरुआत कैसे हुई?

24 घंटे के समय का विचार प्राचीन मिस्र की देन है। लगभग 1550 ईसा पूर्व से शुरू हुए न्यू किंगडम के दौरान मिस्रवासी समय को मापने के लिए तारों का उपयोग करने लगे थे। वे 24 विशेष तारों का निरीक्षण करते थे, जिनमें से 12 तारे रात के प्रगति को दर्शाते थे। इसी से 24 घंटे के दिन की अवधारणा का विकास हुआ।

लेकिन उस समय के घंटे आज जैसे बराबर नहीं थे। दिन और रात के घंटे लंबाई में अलग-अलग होते थे। गर्मियों में दिन लंबे होने के कारण दिन के घंटे भी लंबे होते थे, जबकि सर्दियों में ये छोटे हो जाते थे। रात का समय भी उसी हिसाब से बदलता था।

मिस्रवासी सूर्य घड़ियों और जल घड़ियों के साथ-साथ ताराओं पर भी निर्भर थे। यह प्रणाली धीरे-धीरे विकसित हुई और बाद में यूनानी और रोमन सभ्यताओं ने इसे आगे बढ़ाया। आज हम जिस 24 घंटे के समान घंटों वाले समय का उपयोग करते हैं, वह इन्हीं प्राचीन परंपराओं का आधुनिक रूप है।

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