धारा 280: जलयान चलाने के साथ सावधानी का नियम

भारतीय दंड संहिता की धारा 280 का संबंध उन लोगों से है जो जलयान (नाव या तैरने वाले वाहन) को लापरवाही या उतावलेपन के साथ चलाते हैं। यह धारा उन खतरनाक कार्यों के खिलाफ कानूनी सजा प्रदान करती है जिनसे मानव जीवन को खतरा हो सकता है।

ऐसे में, यदि कोई व्यक्ति नाव या किसी अन्य जलयान को इतनी लापरवाही से चलाए कि उससे दूसरे लोगों को चोट लगने या जान खतरे में पड़ने की संभावना हो, तो वह इस धारा के तहत दोषी माना जा सकता है।

इस अपराध की सजा छह महीने तक की कैद या 1000 रुपए तक का जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है। यह नियम सिर्फ यात्रियों के साथ नहीं, बल्कि नदी, झील या समुद्र में चलने वाले सभी जलयानों के सुरक्षित संचालन की गारंटी देने के लिए बनाया गया है।

इसके पीछे मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। कई बार तेज गति या नशे में जलयान चलाने से दुर्घटनाएं होती हैं, जिससे जानमाल की हानि हो सकती है

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