29 फरवरी कब आती है और क्यों?
29 फरवरी हर चार साल बाद आती है, जिसे हम लीप ईयर यानी अधिवर्ष कहते हैं। लेकिन क्यों ऐसा होता है? इसके पीछे प्रकृति का एक सुंदर वैज्ञानिक तर्क है।
हमारी पृथ्वी सूर्य की पूरी परिक्रमा करने में 365 दिन और लगभग 6 घंटे का समय लेती है। मतलब हर साल 6 घंटे का अतिरिक्त समय बच जाता है। यह 6 घंटे अगले साल नहीं जोड़े जाएंगे तो धीरे-धीरे हमारा कैलेंडर मौसम से अलग होने लगेगा।
इसीलिए, हर चौथे साल इन बचे हुए घंटों को जोड़कर एक दिन की वृद्धि की जाती है। यही अतिरिक्त दिन 29 फरवरी के रूप में आता है। ऐसा करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि हमारा कैलेंडर पृथ्वी की वास्तविक गति के साथ संतुलित रहे।
इस व्यवस्था का ख्याल रोमन काल से है, लेकिन आधुनिक समय में इसे जूलियन और फिर ग्रेगोरियन कैलेंडर में सुधारा गया। आज, जब भी आप 29 फरवरी को देखें, तो जान लें कि यह न सिर्फ एक अतिरिक्त दिन है, बल्कि एक ऐसा दिन है जो पृथ्व
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