लीप वर्ष क्यों आता है?
क्या आपने कभी सोचा है कि फरवरी महीने में सिर्फ 28 दिन होते हैं, लेकिन हर चार साल बाद 29 दिन क्यों हो जाते हैं? इसके पीछे का कारण है – लीप वर्ष।
पृथ्वी सूर्य की एक पूरी परिक्रमा लगभग 365 दिन और 6 घंटे में पूरी करती है। यानी हर साल 6 घंटे का अतिरिक्त समय बच जाता है। इन 6 घंटों को जोड़कर देखें, तो हर 4 वर्ष में यह लगभग 24 घंटे, यानी एक पूरा दिन बन जाता है।
इसी एक दिन को नियमित वर्षों के साथ समायोजित करने के लिए हर चौथे वर्ष में फरवरी में एक दिन जोड़ दिया जाता है। इस तरह 365 दिन के साल की जगह 366 दिन का साल होता है। इसे ही लीप वर्ष कहते हैं।
अगर ऐसा नहीं किया जाए, तो समय के साथ मौसम और तिथियों में गड़बड़ी होने लगेगी। उदाहरण के लिए, गर्मियां धीरे-धीरे जून की जगह अप्रैल या मार्च में आने लग सकती थीं। इसलिए लीप वर्ष एक तरह से प्रकृति और कैलेंडर में संतुलन बनाए रखने का तरीका है।
तो अगली बार जब 29
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