कृष्ण ने पांच गांव क्यों मांगे थे?

महाभारत के युद्ध से पहले, जब संधि की संभावनाएं टूटने लगी थीं, तब श्रीकृष्ण ने अंतिम प्रयास के रूप में शांति बनाए रखने के लिए एक सरल मांग रखी। वे चाहते थे कि कौरव केवल पांच गांव पांडवों को सौंप दें ताकि भीषण युद्ध टल सके। ये गांव थे – इंद्रप्रस्थ (आधुनिक दिल्ली), स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत), पंप्रस्थ (पानीपत), व्याघ्रप्रस्थ (बागपत) और तिलप्रस्थ (तिलपत)।

यह मांग किसी राज्य की वापसी की नहीं, बल्कि सिर्फ एक सम्मानजनक सहारे की थी। पांडवों को अपना अधिकार नहीं मिला था, लेकिन फिर भी वे सिर्फ पांच छोटे गांव मांगकर युद्ध को रोकना चाहते थे। कृष्ण का उद्देश्य स्पष्ट था – धरती नहीं, बल्कि शांति चाहिए।

लेकिन कौरवों ने इस मांग को भी ठुकरा दिया। दुर्योधन ने एक गांव तक न देने का दृढ़ निर्णय ले लिया। इतना कम मांगने पर भी असहमति हुई, तो कृष्ण ने कहा – “रक्तपात अब अनिवार्य है।”

इस घटना से पता चलता है कि कृष्ण कितना अंतिम प्रय

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