मनुष्य के अंतर्निहित शत्रु: काम से लेकर द्वेष तक

कभी सोचा है कि इंसान को सबसे ज्यादा नुकसान कौन करता है? हाँ, बाहरी परिस्थितियाँ भी असर डालती हैं, लेकिन सच तो यह है कि सबसे बड़े शत्रु तो मनुष्य के अपने भीतर ही छिपे हैं। केशव कृष्ण के अनुसार, मनुष्य के छह सबसे बड़े आंतरिक शत्रु हैं – काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और द्वेष

ये छहों ऐसे दुश्मन हैं जो धीरे-धीरे बुद्धि को भ्रष्ट कर देते हैं। काम वह प्रथम पगडंडी है जहाँ से बुराई शुरू होती है। जब इच्छाएँ अत्यधिक हो जाएँ, तो वे काम बन जाती हैं। फिर आता है क्रोध – जब इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं, तो क्रोध का जन्म होता है।

लोभ धन और सुख के लिए अति तड़प है। यह इंसान को अनैतिक रास्तों पर ले जाता है। मोह परिवार, संपत्ति या संबंधों के प्रति अति लगाव है, जो आत्मस्वार्थी बना देता है। ईर्ष्या दूसरों की सफलता देखकर दिल में आग लगा देती है। और अंत में, द्वेष – जो मन को विषैला

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