संगीत के 7 मुख्य स्वर: ध्वनियों की एक अनोखी दुनिया

संगीत हमारी जिंदगी में मिठास घोलने का काम करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि संगीत की यह खूबसूरत दुनिया बनती कैसे है? इसका जवाब छिपा है संगीत के मुख्य नोटों (Musical Notes) में। क्रोमैटिक स्केल (Chromatic Scale) या संगीत के पैमाने पर मुख्य रूप से 7 स्वर होते हैं, जिन्हें अंग्रेजी में A, B, C, D, E, F, और G कहा जाता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में इन्हें ही हम सा, रे, ग, म, प, ध, नि के नाम से जानते हैं।

ये 7 स्वर केवल अक्षर नहीं हैं, बल्कि ये अलग-अलग आवृत्ति (Frequency) और पिच (Pitch) को दर्शाते हैं। जब भी कोई गायक गाता है या कोई वाद्य यंत्र बजाया जाता है, तो हवा में अलग-अलग गति से कंपन (Vibration) पैदा होता है। इसी कंपन की गति या आवृत्ति से तय होता है कि स्वर कितना तीखा या भारी सुनाई देगा।

उदाहरण के तौर पर, संगीत में "मिडिल A" नोट की आवृत्ति 440 Hz होती है, जिसका अर्थ है कि यह ध्वनि प्रति सेकंड 440 बार कंपित होती है। वहीं "मिडिल B" नोट की आवृत्ति 494 Hz होती है। जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, आवाज की पिच भी ऊंची होती जाती है।

इन्हीं 7 मूलभूत स्वरों को अलग-अलग क्रम और ताल में जोड़कर दुनिया भर की धुनें, गीत और मधुर संगीत तैयार किए जाते हैं। संक्षेप में कहें तो, संगीत के ये सात नोट ही उस विशाल और सुंदर संगीतमय इमारत की नींव हैं।

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