भारतीय संगीत के सात मुख्य स्वर
संगीत हमारे जीवन में रस भरता है, और इसका सबसे सुंदर आधार हैं इसके स्वर। भारतीय शास्त्रीय संगीत हो या लोक संगीत, पूरी गायकी और वादन सात मुख्य स्वरों पर ही टिका होता है। इन्हें संगीत की बुनियाद माना जाता है।
हमारे संगीत में ये सात स्वर क्रम से इस प्रकार हैं: षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद। इन्हें हम आम भाषा में इनके संक्षिप्त नामों - सा, रे, ग, म, प, ध, नि से जानते हैं। इन्हीं सात स्वरों के समूह को 'सप्तक' कहा जाता है।
रोचक बात यह है कि प्राचीन काल में इन स्वरों का जुड़ाव प्रकृति और पशु-पक्षियों की ध्वनियों से माना गया था। जैसे 'सा' की ध्वनि मयूर यानी मोर की आवाज से ली गई है, तो 'रे' चातक पक्षी से प्रेरित है। इनमें से 'सा' और 'प' को अचल स्वर कहा जाता है, क्योंकि इनका रूप नहीं बदलता, जबकि बाकी पांच स्वर कोमल या तीव्र होकर बदल भी सकते हैं।
इन सातों स्वरों के अद्भुत तालमेल से ही अनगिनत रागों का जन्म होता है। जब एक कलाकार सही सुर और लय के साथ इन स्वरों को पिरोता है, तो सुनने वाले का मन आनंद से भर उठता है। यही वजह है कि भारत का संगीत पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान रखता है।
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