कृष्ण की आठ पत्नियां: अष्टभार्या की दिव्य कथा
भगवान श्रीकृष्ण, द्वारका के महान राजा और धर्म के संस्थापक, अपनी लीलाओं के साथ-साथ अपने प्रेम और पत्नियों के प्रति समर्पण के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी आठ मुख्य पत्नियों को अष्टभार्या कहा जाता है, जिनका उल्लेख भागवत पुराण में मिलता है। ये आठों पत्नियां न केवल राजसी गौरव की प्रतिनिधि थीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व की भी धारक थीं।
इनमें सबसे प्रथम और प्रियतम रुक्मिणी हैं, जिन्हें कृष्ण ने विवाह के माध्यम से अपनी जीवनसंगिनी बनाया। सत्यभामा, द्वारका की दूसरी प्रमुख रानी, भक्ति और गर्व की प्रतिमूर्ति हैं। जाम्बवती, ऋषि जाम्बवान की पुत्री, एक दैवीय योद्धा थीं। कालिंदी, सूर्य देव की पुत्री, निष्काम प्रेम की प्रतीक हैं।
अन्य पत्नियों में मित्रविंदा (अवंतीपुर की राजकुमारी), नागनजिती (एक नाग वंश की राजकुमारी), भद्रा (यदुवंशी राजा की पुत्री), और लक्ष्मणा
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