भारत में फुटबॉल की शुरुआत: एक अनकही कहानी

आज फुटबॉल भारत में लाखों दिलों की धड़कन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खेल हमारे यहाँ कैसे शुरू हुआ? उन्नीसवीं शताब्दी में, जब कलकत्ता भारत की राजधानी थी, तो ब्रिटिश सैनिकों ने यह खेल पहली बार भारतीयों के बीच पेश किया। धीरे-धीरे, यह शहर के स्कूलों और कॉलेजों में फैलने लगा।

लेकिन एक नाम जो इतिहास के पन्नों में कम छपा है, वह है नागेंद्र प्रसाद सरबधकारी। उन्हें भारतीय फुटबॉल का जनक कहा जाता है। कहते हैं कि जब वह स्कूल में थे, तो उन्होंने अपने सहपाठियों को मजबूर कर दिया कि वे खेल के मैदान में फुटबॉल खेलें। उनके जुनून ने एक ऐसी परंपरा की नींव रखी, जो आज लाखों युवाओं को प्रेरित करती है।

फुटबॉल की यह यात्रा ब्रिटिश छावनियों से शुरू हुई, लेकिन भारतीयों के दिल ने इसे अपना बना लिया। आज, जब हम फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने का सपना देखते हैं, तो उस एक छात्र की याद आती है,

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय