सबसे शुद्ध पानी: वर्षा का जल

जब बात स्वच्छ और शुद्ध पानी की होती है, तो सबसे पहले दिमाग में वर्षा के पानी की छवि आती है। वर्षा का पानी प्रकृति द्वारा प्रदत्त सबसे शुद्ध जल रूप माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह प्रकृति के विशाल शुद्धिकरण प्रक्रिया — वाष्पीकरण — से गुजरता है।

सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों और झीलों का पानी वाष्प बनकर आसमान में उठता है। इस प्रक्रिया में लवण, मैल, कीटाणु और अन्य अशुद्धियाँ पीछे रह जाती हैं। फिर यह भाप बादलों में बदलकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर लौटती है। इस तरह वर्षा का जल लगभग पूरी तरह शुद्ध होता है।

हालाँकि, आज के समय में वातावरण में बढ़ते प्रदूषण के कारण वर्षा का पानी भी शुद्ध नहीं रहा। वायुमंडल में मौजूद धूल, राख, केमिकल और गैसें बादलों में मिलकर वर्षा जल को भी प्रदूषित कर देती हैं। फिर भी, प्राकृतिक शुद्धिकरण की दृष्टि से यह अन्य स्रोतों की तुलना में काफी अधिक स्वच्छ माना जाता है।

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