मदीना का पुराना नाम: यसरिब से मदीना तक

मदीना, इस्लाम के दूसरे सबसे पवित्र शहर को इस्लाम आने से पहले यसरिब के नाम से जाना जाता था। यह शहर अरब के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित था और वहाँ कई कबीलों का निवास था। इतिहास के पन्नों में यसरिब कई बार लड़ाई और आंतरिक संघर्षों के लिए जाना जाता था।

साल 622 ईस्वी में जब पैगंबर मुहम्मद (अल्लाह की शांति उन पर हो) मक्का से हिजरत करके यहाँ आए, तब शहर के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उनके आने के बाद शहर को मदीनतुल-मुनव्वरा, यानी "प्रकाशमय नगरी" कहा जाने लगा, जिसे सामान्यतः मदीना कहा जाता है।

कहा जाता है कि मदीना का नाम पैगंबर मुहम्मद ने व्यक्तिगत रूप से दिया। इसका मतलब "शहर" या "नगर" होता है, जो इस जगह के महत्व को दर्शाता है। यहाँ पहली मस्जिद, मस्जिद कुबा का निर्माण भी उनके समय में हुआ और यहीं पैगंबर का अंतिम विश्राम स्थल है।

आज मदीना न सिर्फ एक शहर है, बल्कि लाखों मुसलमानों के दिलों म

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