राजा का जंगल में रास्ता भटक जाना
एक समय की बात है, जब एक महान राजा शिकार के शौक में जंगल के गहरे हिस्से तक चले गए। वे अपने दरबारियों से आगे-आगे निकल गए और धीरे-धीरे इतना आगे बढ़ गए कि पीछे मुड़कर देखा तो न तो उनके साथी दिखे, न ही कोई जाना-पहचाना रास्ता।
अंधेरा होने लगा था। पेड़ों की घनी छाया में राजा अकेले खड़े थे, भूखे, प्यासे और थके हुए। उन्हें एहसास हुआ कि वह रास्ता भूल चुके हैं। हवा में सन्नाटा था, बस कभी-कभी किसी जानवर की आवाज़ आती। राजा को डर लगने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
कहते हैं, कई घंटे तक वह रास्ता तलाशते रहे। पेड़, झाड़ियाँ, नदी के किनारे—सब कुछ एक जैसा लग रहा था। धीरे-धीरे उनकी ताकत खत्म हो रही थी। फिर भी वह आगे बढ़ते रहे, उम्मीद के सहारे।
इस घटना ने बाद में एक सबक दिया—अहंकार और लालच कभी भी इंसान को उसकी सीमाओं से आगे धकेल सकते हैं। राजा ने शिकार के लिए निकलकर न सिर्फ रास
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